ताइपे : अमेरिका ने चीन से ताइवान पर बढ़ते दबाव को रोकने की अपील की है। साथ ही सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बीजिंग सीधे सैन्य संघर्ष की बजाय अब तेजी से “ग्रे ज़ोन” रणनीति का इस्तेमाल कर रहा है। यह जानकारी ताइवान के समाचार पत्र ताइपे टाइम्स की एक रिपोर्ट में सामने आई है।
यह प्रतिक्रिया उस घटना के बाद आई जब ताइवान के तटरक्षक बल ने द्वीप के प्रतिबंधित समुद्री क्षेत्र से पांच चीनी जहाजों को बाहर जाने के लिए मजबूर किया। बताया गया है कि ये गश्ती अभियान ताइवान के पूर्वी जलक्षेत्र में जापान और फिलीपींस के बीच चल रही समुद्री सीमा वार्ता पर चीन की आपत्तियों से जुड़ा था।
रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने ताइवान की केंद्रीय समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा कि वाशिंगटन अपने सहयोगी देशों जापान और फिलीपींस द्वारा समुद्री विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के प्रयासों का समर्थन करता है। उन्होंने चीन से सैन्य, कूटनीतिक और आर्थिक दबाव डालने की नीति छोड़कर ताइवान की लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकार के साथ सार्थक बातचीत करने का आग्रह भी किया।
फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज़ के शोधकर्ता और पूर्व राजनयिक क्रेग सिंगलटन ने कहा कि चीन अब खुली जंग के बजाय “ग्रे ज़ोन” अभियानों को प्राथमिकता दे रहा है। उनके अनुसार बीजिंग अक्सर “प्रशासनिक कानून प्रवर्तन कार्रवाई” जैसे अस्पष्ट शब्दों का इस्तेमाल करता है, ताकि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत गंभीर माने जाने वाले कदमों की वास्तविक प्रकृति को छिपाया जा सके।
सिंगलटन का मानना है कि इस तरह की शब्दावली चीन की गतिविधियों को कम विवादास्पद दिखाने की कोशिश करती है, जबकि इससे क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित होती है और ताइवान पर दबाव बढ़ता है। उन्होंने अमेरिका से ताइवान के प्रतिबंधित जलक्षेत्र में चीनी घुसपैठ का अधिक सख्ती से जवाब देने की भी अपील की।
एएनआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन का “ग्रे ज़ोन” अभियान अब केवल समुद्री गतिविधियों तक सीमित नहीं है। इसमें ताइवान के हवाई क्षेत्र में घुसपैठ, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर साइबर हमले और भ्रामक सूचनाएं फैलाने जैसे प्रयास भी शामिल हैं, जिनका उद्देश्य ताइवान के समाज की एकजुटता और भरोसे को कमजोर करना है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की गतिविधियां ताइवान की जनता का विश्वास कम करने की रणनीति का हिस्सा हैं और 2028 के राष्ट्रपति चुनाव तक भी बीजिंग की नीति का अहम हिस्सा बनी रह सकती हैं।