गांधीनगर : अहमदाबाद में हुए भीषण विमान हादसे को एक वर्ष पूरा हो चुका है, लेकिन दुर्घटना की अंतिम जांच रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं हो सकी है। इस बीच पायलट समुदाय लगातार इस बात पर सवाल उठा रहा है कि दुर्घटना के लिए केवल पायलटों को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की जा रही है, जबकि विमान में संभावित तकनीकी खराबी की दिशा में भी गंभीर जांच होनी चाहिए।
दुर्घटना के लगभग एक महीने बाद, 12 जुलाई 2025 को एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआईबी) ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट जारी की थी। इस रिपोर्ट ने व्यापक बहस को जन्म दिया था क्योंकि उसमें अप्रत्यक्ष रूप से कमांडर पायलट सुमित सबरवाल की भूमिका पर प्रश्न उठाए गए थे।
हालांकि पायलट संगठनों का कहना है कि विमान निर्माता कंपनी बोइंग की संभावित तकनीकी खामियों को छिपाने के लिए पायलट को बलि का बकरा बनाया जा रहा है। 12 जून 2025 को अहमदाबाद से उड़ान भरने के तुरंत बाद दुर्घटनाग्रस्त हुए एयर इंडिया ड्रीमलाइनर हादसे में 260 लोगों की जान चली गई थी। पायलटों का तर्क है कि विमान के थ्रॉटल कंट्रोल यूनिट को दो बार बदलने की आवश्यकता क्यों पड़ी, यह प्रश्न आज भी अनुत्तरित है। उनका मानना है कि यही पहलू तकनीकी गड़बड़ी की ओर संकेत करता है, क्योंकि कॉकपिट में मौजूद दोनों फ्यूल कंट्रोल स्विच इसी प्रणाली का हिस्सा होते हैं।
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में कहा गया था कि कॉकपिट के दोनों फ्यूल कंट्रोल स्विच अचानक “रन” स्थिति से “कट-ऑफ” स्थिति में चले गए थे। इसके परिणामस्वरूप इंजन तक ईंधन की आपूर्ति बंद हो गई और विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। जांचकर्ताओं ने कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर का विश्लेषण करने के बाद दावा किया था कि सह-पायलट क्लाइव कुंदर ने कमांडर पायलट सुमित सबरवाल से पूछा था, “आपने स्विच को रन से कट-ऑफ पर क्यों किया?” इसके जवाब में सुमित ने कथित रूप से कहा था, “मैंने ऐसा नहीं किया।”
इसके बावजूद दुर्घटना के वास्तविक कारणों को लेकर अब तक स्पष्ट निष्कर्ष सामने नहीं आया है। दुर्घटना के बाद केंद्र सरकार ने संकेत दिया था कि एक वर्ष के भीतर अंतिम रिपोर्ट जारी कर दी जाएगी। शुक्रवार तक इस रिपोर्ट के सामने आने की उम्मीद थी, लेकिन विमानन क्षेत्र से जुड़े सूत्रों का कहना है कि रिपोर्ट जारी होने में लगभग तीन महीने और लग सकते हैं।
बताया जा रहा है कि जांच दल को जटिल तकनीकी विश्लेषण की प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है। इसके अलावा, अमेरिका में विमान के इंजन की विस्तृत जांच अभी भी जारी है और उसकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
वरिष्ठ भारतीय पायलट इस देरी को असामान्य नहीं मानते। वे वर्ष 2022 में चीन में हुई एक बड़ी विमान दुर्घटना का उदाहरण देते हैं। 21 मार्च 2022 को चाइना ईस्टर्न एयरलाइंस का एक विमान कुनमिंग से ग्वांगझोउ जाते समय लगभग 35 हजार फीट की ऊंचाई से सीधे नीचे गिरकर पर्वतीय क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। उस हादसे में 132 लोगों की मृत्यु हुई थी।
प्रारंभिक जांच में कहा गया था कि चालक दल, विमान, रखरखाव व्यवस्था और मौसम—किसी भी पहलू में कोई असामान्यता नहीं पाई गई थी। इसके बावजूद विमान क्यों गिरा, इसका अंतिम निष्कर्ष आज तक सार्वजनिक नहीं हुआ है। उल्लेखनीय है कि वह विमान भी बोइंग 737 मॉडल का था।
विशेषज्ञ 31 अक्टूबर 1999 को अटलांटिक महासागर में दुर्घटनाग्रस्त हुए इजिप्ट एयर विमान हादसे का भी उल्लेख कर रहे हैं। उस दुर्घटना में 217 लोगों की मौत हुई थी। संबंधित विमान बोइंग 767 था। उस समय अमेरिकी जांच एजेंसियों ने पायलटों की गलती को दुर्घटना का कारण बताया था, लेकिन मिस्र सरकार ने इस निष्कर्ष को स्वीकार नहीं किया। बाद में मिस्र द्वारा कराई गई अलग जांच में तकनीकी खराबी को प्रमुख कारण माना गया था।
अहमदाबाद विमान हादसे के मामले में भी बताया जा रहा है कि एएआईबी जल्द ही एक स्थिति रिपोर्ट जारी कर सकती है, जिसमें अंतिम रिपोर्ट में हो रही देरी के कारणों की जानकारी दी जाएगी।
इस जांच में एएआईबी के साथ अमेरिका की नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (एनटीएसबी), विमान निर्माता बोइंग तथा इंजन निर्माता कंपनी जीई एयरोस्पेस भी शामिल हैं।
पायलट समुदाय का आरोप है कि जांच को इस दिशा में मोड़ने की कोशिश की जा रही है जिससे कमांडर पायलट सुमित सबरवाल को जिम्मेदार ठहराया जा सके। दूसरी ओर, दुर्घटना वाले दिन विमान में कथित रूप से विद्युत प्रणाली में खराबी आने की चर्चाएं भी सामने आ चुकी हैं।
ऐसे में यदि जांच के दौरान यह साबित होता है कि हादसे के पीछे बोइंग विमान की तकनीकी खामी जिम्मेदार थी, तो इससे अमेरिकी विमानन उद्योग और संबंधित कंपनियों पर गंभीर दबाव बढ़ सकता है। इसी कारण जांच एजेंसियों पर भी व्यापक दबाव होने की चर्चा की जा रही है। फिलहाल विमान दुर्घटना के वास्तविक कारणों को लेकर अंतिम निष्कर्ष सामने आने का इंतजार किया जा रहा है।