🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

OSM मार्किंग विवाद में छात्रों को झटका, रीवैल्यूएशन पोर्टल खोलने पर दिल्ली हाईकोर्ट का इनकार

एनएसयूआई की याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया, जुलाई में होगी अगली सुनवाई।

By श्वेता सिंह

Jun 12, 2026 17:32 IST

कोलकाताः सीबीएसई की कक्षा 12वीं की परीक्षा में ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर उठे विवाद के बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने रीवैल्यूएशन पोर्टल दोबारा खोलने की मांग पर तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया है। शुक्रवार को अवकाशकालीन पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कोई अंतरिम निर्देश जारी नहीं किया और मामले को जुलाई में नियमित पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा और न्यायमूर्ति मधु जैन की खंडपीठ ने केंद्र सरकार और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की ओर से प्रस्तुत दलीलें सुनने के बाद यह फैसला लिया।

सीबीएसई ने बताया-बड़ी संख्या में शिकायतें मिलीं

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सीबीएसई (CBSE) के पोर्टल के माध्यम से लगभग 1.27 लाख छात्र अपनी शिकायतें दर्ज करा चुके हैं। इन छात्रों से संबंधित करीब 3.86 लाख उत्तर पुस्तिकाओं की समीक्षा की जा रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया पहले ही दो बार खोली जा चुकी है और प्रभावित छात्रों को आवेदन का अवसर दिया गया था। उनके अनुसार यदि अब फिर से पोर्टल खोला जाता है तो 70 लाख से अधिक छात्रों की उच्च शिक्षा में प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, क्योंकि परिणामों और दस्तावेजों के अंतिम निस्तारण में देरी होगी।

एनएसयूआई ने मांगी थी तीन दिन के लिए राहत

याचिकाकर्ता एनएसयूआई की ओर से अदालत से अनुरोध किया गया कि रीवैल्यूएशन पोर्टल कम से कम तीन दिनों के लिए दोबारा खोला जाए ताकि प्रभावित छात्र आवेदन कर सकें।

एनएसयूआई का तर्क था कि पोर्टल खुलने से सभी छात्रों पर असर नहीं पड़ेगा, बल्कि केवल वही छात्र आवेदन करेंगे जिन्हें मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर शिकायत है। संगठन ने जनहित याचिका दाखिल कर एक महीने तक पोर्टल खुले रखने और प्रभावित छात्रों को क्षतिपूरक अंक देने की मांग भी की है।

ओएसएम प्रणाली पर उठे सवाल

याचिका में सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल उठाए गए हैं। इसमें दावा किया गया है कि परिणाम घोषित होने के बाद देशभर के छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों ने धुंधली स्कैन कॉपियों, गायब पृष्ठों, अधूरी अपलोडिंग, उत्तर पुस्तिकाओं के मिलान में गड़बड़ी और अपेक्षा से कम अंक मिलने जैसी शिकायतें उठाईं।

याचिका के अनुसार यह समस्या कुछ छात्रों तक सीमित नहीं रही, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई क्योंकि मूल्यांकन की डिजिटल प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े होने लगे।

सीबीएसई ने याचिका की वैधता पर उठाया सवाल

सुनवाई के दौरान सीबीएसई की ओर से यह आपत्ति भी दर्ज कराई गई कि याचिकाकर्ता एनएसयूआई एक राजनीतिक दल का छात्र संगठन है, इसलिए उसकी जनहित याचिका की स्वीकार्यता पर विचार किया जाना चाहिए।

हालांकि याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से अधिवक्ता मोहम्मद अली खान और ऋषव रंजन ने अदालत को बताया कि एनएसयूआई 55 वर्षों पुराना छात्र संगठन है और बड़ी संख्या में छात्र नाबालिग होने के कारण स्वयं अदालत का दरवाजा नहीं खटखटा सकते। इसलिए संगठन छात्रों की चिंताओं को न्यायालय के सामने रख रहा है।

मैनुअल जांच और जिम्मेदार कंपनी पर कार्रवाई की मांग

याचिका में प्रभावित छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं की भौतिक जांच और मैनुअल पुनर्मूल्यांकन की अनुमति देने की मांग की गई है। इसके अलावा ओएसएम प्रणाली में कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की गई है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि कक्षा 12वीं के अंक केवल शैक्षणिक रिकॉर्ड नहीं होते, बल्कि विश्वविद्यालयों में प्रवेश, छात्रवृत्ति, पेशेवर पाठ्यक्रमों और भविष्य की शैक्षणिक संभावनाओं पर सीधा असर डालते हैं। ऐसे में मूल्यांकन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की त्रुटि छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर सकती है।

जुलाई में होगी अगली सुनवाई

अदालत ने फिलहाल रीवैल्यूएशन पोर्टल दोबारा खोलने का कोई आदेश नहीं दिया है। अब इस मामले पर जुलाई में नियमित पीठ के समक्ष विस्तार से सुनवाई होगी। तब तक सीबीएसई की मौजूदा शिकायत निवारण प्रक्रिया जारी रहेगी और प्रभावित छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं की समीक्षा का काम चलता रहेगा।

Articles you may like: