नई दिल्ली : भारत के महान निशानेबाज और प्रतिष्ठित कोच जसपाल राणा के निधन पर पूरे देश में शोक की लहर है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे देश के लिए “अपूरणीय क्षति” बताया।
अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर शोक संदेश साझा करते हुए कहा कि जसपाल राणा ने अपने जीवन को भारतीय निशानेबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए समर्पित कर दिया था। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए सम्मान अर्जित किया और कोच के रूप में युवा निशानेबाजों को तैयार कर भारतीय खेल जगत को नई दिशा दी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जताया शोक
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जसपाल राणा के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भारतीय खेल जगत ने एक ऐसे व्यक्तित्व को खो दिया है जिसने अपने असाधारण प्रदर्शन और समर्पण से देश का नाम विश्वभर में रोशन किया।
प्रधानमंत्री ने कहा, “श्री जसपाल राणा जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। उनका जाना भारतीय खेल जगत के लिए गहरी क्षति है। उन्होंने निशानेबाजी में अपनी असाधारण उपलब्धियों के माध्यम से देश को अपार गौरव दिलाया। एक मार्गदर्शक और प्रशिक्षक के रूप में भी उनका योगदान उतना ही उल्लेखनीय रहा। उन्होंने समर्पण के साथ युवा खिलाड़ियों का मार्गदर्शन किया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उत्कृष्टता, अनुशासन और खेल जगत की सेवा के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता ने उन्हें व्यापक सम्मान दिलाया। इस कठिन समय में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार, मित्रों और पूरे खेल समुदाय के साथ हैं। ओम शांति।”
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने बताया बड़ी क्षति
पुष्कर सिंह धामी ने भी जसपाल राणा के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड के इस गौरवशाली पुत्र का असामयिक निधन अत्यंत दुखद और हृदयविदारक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पद्मश्री से सम्मानित जसपाल राणा ने निशानेबाजी के क्षेत्र में जो ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कीं, उन्होंने भारत को वैश्विक मंच पर गौरवान्वित किया। युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करने में उनकी भूमिका हमेशा याद रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि खेल जगत, उत्तराखंड और पूरे देश के लिए उनका निधन ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई संभव नहीं है।
भारतीय निशानेबाजी के सबसे सफल खिलाड़ियों में थे जसपाल राणा
जसपाल राणा भारत के सबसे सफल और सम्मानित निशानेबाजों में गिने जाते हैं। तीन दशक से अधिक लंबे करियर में उन्होंने देश के लिए अनेक ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कीं।
वे राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में भारत के सबसे सफल खिलाड़ियों में शामिल रहे। उन्होंने 1994, 1998, 2002 और 2006 राष्ट्रमंडल खेलों में कुल 15 पदक जीते। इनमें नौ स्वर्ण, चार रजत और दो कांस्य पदक शामिल हैं।
एशियाई खेलों और विश्व चैंपियनशिप में भी किया कमाल
राष्ट्रमंडल खेलों के अलावा एशियाई खेलों में भी जसपाल राणा का प्रदर्शन शानदार रहा। उन्होंने एशियाई खेलों में चार स्वर्ण और एक रजत पदक अपने नाम किया। साल 1994 के हिरोशिमा एशियाई खेलों में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता था, जबकि 2006 के दोहा एशियाई खेलों में उन्होंने तीन स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया था।साल 1994 में मिलान में आयोजित विश्व निशानेबाजी चैंपियनशिप में उन्होंने स्वर्ण पदक जीतने के साथ रिकॉर्ड स्कोर भी बनाया था। इसके अलावा 2006 एशियाई खेलों में 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल स्पर्धा में 590 अंकों के साथ विश्व रिकॉर्ड की बराबरी भी की थी।
कोच के रूप में भी छोड़ी अमिट छाप
जसपाल राणा केवल एक महान खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि एक सफल प्रशिक्षक भी थे। अपने निधन के समय वह भारतीय पिस्टल निशानेबाजी टीम के हाई-परफॉर्मेंस कोच के रूप में कार्यरत थे।
उन्होंने अनेक युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके मार्गदर्शन में कई भारतीय निशानेबाजों ने विश्व स्तर पर शानदार प्रदर्शन किया और देश का नाम रोशन किया।
एक चैंपियन निशानेबाज और प्रेरणादायी कोच के रूप में जसपाल राणा की विरासत भारतीय खेल इतिहास में हमेशा अमर रहेगी। उनके योगदान को खेल प्रेमी और आने वाली पीढ़ियां लंबे समय तक याद रखेंगी।