नई दिल्ली : भारतीय निशानेबाजी जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। देश के सबसे सफल निशानेबाजों और प्रतिष्ठित कोचों में शामिल जसपाल राणा का गुरुवार रात 49 वर्ष की आयु में निधन हो गया। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, उन्होंने दिल्ली के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली। राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) के अध्यक्ष कलिकेश नारायण सिंह देव ने उनके निधन की पुष्टि की है।
जसपाल राणा के निधन की खबर ने खेल जगत को स्तब्ध कर दिया है। कुछ ही दिन पहले वह जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ विश्व कप से लौट रहे थे, जहां यात्रा के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। दिल्ली पहुंचने के बाद उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका इलाज चल रहा था। भारतीय पिस्टल निशानेबाजों के हाई-परफॉर्मेंस कोच के रूप में कार्यरत इस दिग्गज के अचानक निधन से खेल जगत में गहरा शोक व्याप्त है।
खिलाड़ी के रूप में बनाई थी अलग पहचान
जसपाल राणा ने 1990 के दशक में अंतरराष्ट्रीय निशानेबाजी मंच पर अपनी विशेष पहचान बनाई थी। एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक सहित कई पदक जीतने के अलावा उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई चैंपियनशिप में भी लगातार शानदार प्रदर्शन किया।
उनकी उपलब्धियों ने उन्हें भारत के सर्वश्रेष्ठ पिस्टल निशानेबाजों में शामिल कर दिया। उस दौर में जब भारत में निशानेबाजी को व्यापक लोकप्रियता नहीं मिली थी, तब जसपाल राणा ने लगातार पदक जीतकर इस खेल को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनकी सफलता की कहानी ने देश के हजारों युवाओं को प्रेरित किया। कई युवा खिलाड़ियों ने उन्हें आदर्श मानते हुए निशानेबाजी को अपने करियर और सपनों का हिस्सा बनाया।
नई पीढ़ी के निशानेबाजों को तराशने में निभाई बड़ी भूमिका
प्रतिस्पर्धी निशानेबाजी से संन्यास लेने के बाद जसपाल राणा ने कोचिंग को अपना नया मिशन बनाया।
वर्ष 2012 में उन्होंने भारतीय जूनियर पिस्टल कार्यक्रम की जिम्मेदारी संभाली। अगले एक दशक के दौरान उन्होंने देश को कई प्रतिभाशाली निशानेबाज दिए। उनके मार्गदर्शन में सौरभ चौधरी, अनीश भानवाला और चिंकी यादव जैसे खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने में सफल रहे।
जूनियर स्तर पर उनके उत्कृष्ट कार्य का ही परिणाम था कि भारत लगातार विश्व स्तरीय पिस्टल निशानेबाज तैयार करने लगा। भारतीय निशानेबाजी की नई पीढ़ी को मजबूत बनाने में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
मनु भाकर की सफलता के पीछे भी रहा बड़ा योगदान
कोच के रूप में जसपाल राणा का सबसे चर्चित और सफल अध्याय मनु भाकर के साथ जुड़ा रहा। अपने करियर के कठिन और निर्णायक दौर में मनु भाकर को उन्होंने मार्गदर्शन और मानसिक मजबूती प्रदान की। उनकी देखरेख में मनु ने अपने खेल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
इस मेहनत का परिणाम 2024 पेरिस ओलंपिक में देखने को मिला, जब मनु भाकर ने इतिहास रचते हुए महिला 10 मीटर एयर पिस्टल और मिश्रित 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में दो कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया।
मनु की इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे जसपाल राणा की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने न केवल तकनीकी रूप से बल्कि मानसिक रूप से भी मनु को मजबूत बनाने में अहम योगदान दिया।
आखिरी समय तक भारतीय निशानेबाजी के लिए करते रहे काम
फरवरी 2025 में राष्ट्रीय राइफल संघ ने उन्हें 25 मीटर पिस्टल वर्ग का हाई-परफॉर्मेंस कोच नियुक्त किया था। अपने जीवन के अंतिम दिनों तक वह भारतीय निशानेबाजी के विकास और नई प्रतिभाओं को तैयार करने के कार्य में सक्रिय रहे। खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण देने और देश के लिए भविष्य के चैंपियन तैयार करने के उनके प्रयास लगातार जारी रहे।
द्रोणाचार्य पुरस्कार से भी हुए सम्मानित
कोचिंग के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2020 में उन्हें द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया था। यह सम्मान देश के सर्वोच्च खेल सम्मानों में से एक माना जाता है। यह पुरस्कार उनके वर्षों के समर्पण, मेहनत और भारतीय निशानेबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में निभाई गई भूमिका की स्वीकृति था।
जसपाल राणा का निधन भारतीय खेल जगत के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। एक महान खिलाड़ी, प्रेरणादायी कोच और भारतीय निशानेबाजी के सच्चे मार्गदर्शक के रूप में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा।