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पाकिस्तानी सेना ने PoK में फिर किया नरसंहार ? आम लोगों पर बरसाईं गोलियां

हाईवे से लेकर फसलों के खेतों तक, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हर जगह अब सिर्फ आम लोगों के खून के धब्बे दिख रहे ।

By श्वेता सिंह

Jun 12, 2026 00:52 IST

इस्लामाबादः पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) की सड़कें एक बार फिर निहत्थे आम लोगों के खून से सनी हुई हैं। आम जनता सस्ता आटा, चावल, बिजली और जीने के लिए बुनियादी नागरिक अधिकार की मांग कर रही थी। पाकिस्तानी सेना उस आवाज को दबाने के लिए अंधाधुंध हत्याएं कर रही है। 30 लोगों की बेरहमी से हत्या के दो दिन भी नहीं बीते थे कि गुरुवार को फिर खबर आई कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में फिर 16 निहत्थे, शांति से प्रदर्शन कर रहे लोगों की आवाज गोलियों से दबा दी गई।

पिछले मंगलवार को इन मांगों के विरोध में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के साथ झड़पों में 30 लोग मारे गए और 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए। गुरुवार को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के रावलपिंडी के ईदगाह मैदान में एक बड़ी रैली बुलाई गई थी, ताकि बेरहमी से की गयी हत्याओं के लिए न्याय की मांग की जा सके और पाकिस्तान की कब्जे और दमन की नीतियों का विरोध किया जा सके। वहां करीब साठ से सत्तर हजार लोग इकट्ठा हुए थे।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रैली शुरू में शांति से शुरू हुई। लेकिन जैसे ही उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगाने शुरू किए, पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स ने बिना किसी वॉर्निंग के AK-47 राइफल से निहत्थी भीड़ पर फायरिंग शुरू कर दी। खबर आ रही है कि इस गोलीबारी में फिर 16 बेगुनाह आम लोग मौके पर ही मारे गए और कम से कम 37 लोग बुरी तरह घायल हो गए।

हाईवे से लेकर फसलों के खेतों तक, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हर जगह अब सिर्फ आम लोगों के खून के धब्बे दिखायी दे रहे हैं। सेना द्वारा की गई इस हत्या के विरोध में पूरे इलाके में जोरदार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। अब हर जगह एक ही नारा गूंज रहा है – ‘यह जो देशद्रोह है, इसके पीछे वर्दी है’। लोग यही नारे लगाते सुनाई दिये- यह जो आतंकवाद है, इसके पीछे एक यूनिफॉर्म है। आम लोग गांवों में बाजार बंद करके इस क्रूर हिंसा के खिलाफ विरोध मार्च निकाल रहे हैं।

पाक-अधिकृत कश्मीर (PoK) में इन दिनों गुस्सा फूट पड़ा है। स्थानीय लोग महंगाई, बिजली बिलों में भारी वृद्धि, आटे-चावल जैसी जरूरी चीजों की कमी और बुनियादी अधिकारों की मांग कर रहे हैं। इन मांगों को लेकर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमिटी (JAAC) नामक संगठन ने आंदोलन छेड़ा है। यह आंदोलन कई महीनों से चल रहा है। हाल ही में PoK सरकार ने JAAC पर प्रतिबंध लगा दिया और इसे आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया। इसके बावजूद लोग सड़कों पर उतर आए।

गौरतलब है कि 8 जून 2026 को रावलकोट के ईदगाह मैदान और आसपास के इलाकों में बवाल हुआ। JAAC समर्थकों ने एक कार्यकर्ता की हत्या के खिलाफ शोक सभा आयोजित की थी और वहीं विरोध प्रदर्शन किया। पाकिस्तानी सुरक्षा बलों (पुलिस और रेंजर्स) ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए गोलियां चलाईं। पाकिस्तानी प्रशासन के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक कुल 11 मौतें हुई हैं जिसमें 6 प्रदर्शनकारी, 4 पुलिसकर्मी और 1 आम नागरिक शामिल है। 70 से ज्यादा लोग घायल होने की सूचना है।

हालांकि प्रदर्शनकारियों का दावा है कि तकरीबन 27 से 30 या उससे ज्यादा आम नागरिक मारे गए, 200 से अधिक घायल हुए थे। कुछ रिपोर्टों में मौतों की संख्या 150 तक बताई जा रही है, हालांकि ये आंकड़े स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हैं।

रावलकोट के अलावा मुफ्फराबाद, कोटली और अन्य इलाकों में भी तनाव फैला। इंटरनेट बंद कर दिया गया, सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया गया। JAAC के चार प्रमुख नेताओं – सरदार अमान खान, शौकत नवाज मीर, उमर नजीर कश्मीरी और ख्वाजा मेहरान अरशद – पर 1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया गया है।

सरदार अमान खान जैसे नेता कह रहे हैं कि मांगों को “आतंकवाद” का नाम देकर कुचला जा रहा है। JAAC ने पूरे PoK में शटर डाउन और विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया। बाजार बंद हैं, सड़कों पर प्रदर्शन हो रहे हैं। लोग मुजफ्फराबाद की ओर लॉन्ग मार्च की बात कर रहे हैं। PoK के कई इलाकों में स्कूल-कॉलेज बंद हैं और रोजमर्रा की जिंदगी ठप है।

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पाक सरकार की कार्रवाई की निंदा की है। संगठन का कहना है कि JAAC पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार छीना जा रहा है। स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।

भारत ने भी पाकिस्तान से जवाबदेही की मांग की है। PoK में स्थिति अभी भी तनावपूर्ण है। हजारों लोग सड़कों पर हैं और आंदोलन जारी रखने का संकल्प लिया गया है।

PoK के लोग बुनियादी जरूरतों और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पाकिस्तानी सेना और सरकार की कड़ी कार्रवाई ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है। स्वतंत्र मीडिया और जांच की कमी के कारण सही आंकड़े और सच्चाई छिपी रह सकती है। स्थिति पर नजर रखना जरूरी है, क्योंकि यह क्षेत्र पहले से ही अस्थिर है।

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