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भू-राजनीतिक तनाव से डगमगाया शेयर बाजार, निवेशकों की बढ़ी चिंता

एफआईआई निकासी और अमेरिकी महंगाई के असर से बाजार में बनी रही अस्थिरता। आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट, निवेशकों की नजर अब कच्चे तेल पर।

By श्वेता सिंह

Jun 11, 2026 18:17 IST

मुंबईः भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को अस्थिरता का जबरदस्त दौर देखने को मिला। कारोबार की शुरुआत दबाव में हुई, फिर बाजार ने तेजी से वापसी की, लेकिन यह मजबूती ज्यादा देर टिक नहीं सकी। दिन के दूसरे हिस्से में बिकवाली बढ़ने से प्रमुख सूचकांक फिर नीचे फिसल गए और कारोबार के अंत में नुकसान के साथ बंद हुए।

बाजार पर सबसे बड़ा असर पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी और अमेरिकी महंगाई से जुड़ी चिंताओं का दिखाई दिया। निवेशकों ने जोखिम लेने के बजाय सतर्क रुख अपनाया, जिसका असर लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों में देखने को मिला।

सेंसेक्स में 875 अंकों का उतार-चढ़ाव

बीएसई का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 150.63 अंक यानी 0.20 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,832.55 पर बंद हुआ। हालांकि दिनभर के कारोबार में सेंसेक्स ने कई बार दिशा बदली। यह एक समय 74,394.34 के उच्चतम स्तर तक पहुंचा, जबकि निचले स्तर पर 73,518.75 तक फिसल गया। इस तरह पूरे सत्र में लगभग 875 अंकों का उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया।

उधर, एनएसई का निफ्टी 53.35 अंक यानी 0.23 प्रतिशत गिरकर 23,161.60 पर बंद हुआ। यह लगातार दूसरा कारोबारी दिन रहा जब निफ्टी नुकसान में बंद हुआ। कारोबार के दौरान निफ्टी ने 23,327.45 का ऊपरी और 23,072.05 का निचला स्तर छुआ।

बाजार की चौड़ाई ने दिखाई कमजोरी

गिरावट केवल सूचकांकों तक सीमित नहीं रही। बाजार की व्यापक तस्वीर भी कमजोर रही। एनएसई में कारोबार करने वाले 2,807 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि केवल 1,384 शेयरों में बढ़त दर्ज की गई। 198 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। इससे स्पष्ट है कि बिकवाली का दबाव व्यापक स्तर पर मौजूद था।

विदेशी निवेशकों की निकासी बनी चिंता

विश्लेषकों का मानना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली बाजार के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। बुधवार को एफआईआई ने भारतीय शेयर बाजार से 2,124.98 करोड़ रुपये की निकासी की थी। विदेशी पूंजी का बाहर जाना निवेशकों के विश्वास को प्रभावित कर रहा है और बाजार की तेजी को सीमित कर रहा है।

अमेरिकी महंगाई ने बढ़ाई बेचैनी

बाजार की चिंता केवल घरेलू कारणों तक सीमित नहीं रही। अमेरिका में मई महीने की उपभोक्ता महंगाई दर बढ़कर 4.2 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो पिछले तीन वर्षों का उच्चतम स्तर है। ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी इसकी प्रमुख वजह मानी जा रही है।

महंगाई के ऊंचे स्तर का अर्थ यह भी है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना आगे खिसक सकती है। यही आशंका वैश्विक निवेशकों की रणनीति को प्रभावित कर रही है।

कच्चे तेल की चाल पर भी टिकी निगाहें

पश्चिम एशिया के तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव बना हुआ है। ब्रेंट क्रूड ऑयल करीब एक प्रतिशत गिरकर 92.16 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। हालांकि इससे पहले इसकी कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच चुकी थी। तेल की कीमतों में होने वाले बदलाव का सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों की अर्थव्यवस्था और बाजार पर पड़ता है।

आईटी सेक्टर बना सबसे बड़ा दबाव

सेक्टोरल प्रदर्शन में सबसे अधिक कमजोरी सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में दिखाई दी। आईटी इंडेक्स 1.78 प्रतिशत टूट गया। इसके अलावा फोकस्ड आईटी इंडेक्स 1.59 प्रतिशत, इंडस्ट्रियल्स 1.40 प्रतिशत और कैपिटल गुड्स इंडेक्स 1.19 प्रतिशत नीचे रहे।

यूटिलिटी और पावर सेक्टर में भी एक प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। इससे स्पष्ट है कि निवेशकों ने जोखिम वाले सेक्टरों में मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी।

इन शेयरों ने बढ़ाया नुकसान

सेंसेक्स की कंपनियों में इंफोसिस, एचसीएल टेक, अदाणी पोर्ट्स, बजाज फाइनेंस, ईटरनल और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स प्रमुख नुकसान वाले शेयरों में शामिल रहे।

दूसरी ओर कुछ शेयरों ने बाजार को सीमित सहारा देने की कोशिश की। महिंद्रा एंड महिंद्रा, आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और सन फार्मा बढ़त के साथ बंद हुए।

मिडकैप और स्मॉलकैप भी दबाव में

व्यापक बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली। मिडकैप सेलेक्ट इंडेक्स 1.08 प्रतिशत गिरा, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स 0.20 प्रतिशत नीचे बंद हुआ। हालांकि हेल्थकेयर, बैंकिंग और प्राइवेट बैंकिंग इंडेक्स में हल्की मजबूती दर्ज की गई, जिससे बाजार को कुछ समर्थन मिला।

विशेषज्ञों की राय: अस्थिरता अभी जारी रह सकती है

लाइवलॉन्ग वेल्थ के रिसर्च एनालिस्ट हरिप्रसाद के अनुसार बाजार पूरे दिन अत्यधिक अस्थिर रहा। उन्होंने कहा कि शुरुआती नुकसान से उबरने के बाद दोपहर में बाजार ने अपनी पूरी बढ़त गंवा दी।

रेलिगेयर ब्रोकिंग के अजीत मिश्रा का कहना है कि निफ्टी ने रिकवरी की कोशिश जरूर की, लेकिन वह टिकाऊ साबित नहीं हुई। उनके अनुसार मध्य पूर्व का तनाव, अमेरिकी महंगाई और एफआईआई की बिकवाली निवेशकों को सतर्क बनाए हुए हैं।

जियोजित के विनोद नायर ने कहा कि अमेरिकी महंगाई के ऊंचे स्तर का असर विशेष रूप से आईटी सेक्टर पर पड़ा है, क्योंकि इससे ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कमजोर हो सकती हैं।

वैश्विक बाजारों का मिला-जुला रुख

एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी और जापान का निक्केई हल्की बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि चीन का शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग गिरावट में रहे। यूरोपीय बाजारों में सकारात्मक रुझान दिखाई दिया। वहीं अमेरिकी बाजार बुधवार को कमजोरी के साथ बंद हुए थे।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिका की आर्थिक नीतियों, पश्चिम एशिया की स्थिति, विदेशी निवेशकों के निवेश रुख और कच्चे तेल की कीमतों पर रहेगी। यदि वैश्विक अनिश्चितता बनी रहती है तो बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर आगे भी जारी रह सकता है।

(समाचार एई समय कहीं भी निवेश करने की सलाह नहीं देता है। शेयर बाजार या किसी भी निवेश में जोखिम होता है। निवेश से पहले पूरी जानकारी और विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है। यह खबर केवल शिक्षा और जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।)

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