🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

चार साल में एयर इंडिया की बुनियाद मजबूत, लेकिन विमान डिलीवरी में देरी से प्रभावित हुआ विस्तार: सीईओ विल्सन

विदाई से पहले बोले- अब पूर्णकालिक भूमिका नहीं निभाऊंगा, भविष्य में सलाहकार और शिक्षण से जुड़ने की योजना

By श्वेता सिंह

Jun 09, 2026 17:21 IST

नयी दिल्लीः एयर इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और प्रबंध निदेशक कैंपबेल विल्सन ने कहा है कि पिछले चार वर्षों में कंपनी की नींव को मजबूत कर दिया गया है और अब एयरलाइन विस्तार के अगले चरण में प्रवेश करने के लिए तैयार है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि विमान समय पर न मिलने से कंपनी की विकास गति प्रभावित हुई।

विल्सन ने अपने कार्यकाल को बेहद संतोषजनक बताते हुए कहा कि इस दौरान एयर इंडिया में बड़े स्तर पर बदलाव किए गए। कंपनी की संस्कृति में सुधार, चार एयरलाइनों का एकीकरण, ब्रांड पुनर्निर्माण और सेवा गुणवत्ता में सुधार जैसे कदमों ने संगठन को नई दिशा दी है। उनके अनुसार अब एयर इंडिया एक मजबूत आधार के साथ आगे बढ़ने की स्थिति में है।

विमान डिलीवरी में देरी बनी बड़ी बाधा

उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती विमान आपूर्ति में देरी रही। जिन विमानों का ऑर्डर दिया गया था, उनकी समय पर डिलीवरी नहीं हो सकी, जिससे एयर इंडिया के विस्तार और आधुनिकीकरण की योजनाएं प्रभावित हुईं। इसके अलावा बिजनेस और फर्स्ट क्लास सीटों की वैश्विक आपूर्ति में बाधाओं के कारण मौजूदा विमानों के रेट्रोफिट कार्यक्रम में भी करीब दो साल की देरी हुई।

‘अगर समय पर डिलीवरी मिलती तो तस्वीर अलग होती’

सीईओ के अनुसार यदि विमान निर्माता कंपनियां अनुबंध के अनुसार समय पर डिलीवरी कर पातीं और आपूर्ति श्रृंखला सुचारू रहती, तो एयर इंडिया का परिवर्तन और अधिक तेजी से आगे बढ़ चुका होता। हालांकि उन्होंने कहा कि ये सभी परिस्थितियां कंपनी के नियंत्रण से बाहर थीं।

विल्सन ने कहा कि एयर इंडिया का अगला चरण विस्तार का है। आने वाले समय में ऑर्डर किए गए सैकड़ों विमान बेड़े में शामिल होंगे, जिससे कंपनी की क्षमता और नेटवर्क दोनों में बड़ा विस्तार होगा।

वर्तमान में एयर इंडिया समूह के पास 300 से अधिक विमान हैं। एयर इंडिया के पास 184 विमान हैं, जिनमें 34 बोइंग 787 ड्रीमलाइनर, छह ए350 और 19 बोइंग 777-300 ईआर शामिल हैं। हाल ही में दो नए बोइंग 787-9 विमान भी बेड़े में जुड़े हैं।

पूर्णकालिक भूमिका से दूरी की तैयारी

भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए विल्सन ने कहा कि वह अब किसी भी पूर्णकालिक कार्यकारी पद को नहीं संभालेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका इरादा सलाहकार भूमिकाओं, बोर्ड सदस्यता और शिक्षण से जुड़कर अपने अनुभव साझा करने का है। उन्होंने कहा कि तीन दशक से अधिक के करियर में उन्होंने कई देशों में काम किया है और अब वह अपने अनुभव को अगली पीढ़ी के साथ साझा करना चाहते हैं।

विल्सन के अनुसार उनकी शुरुआत से ही योजना थी कि लगभग चार साल के भीतर एयर इंडिया की बुनियाद मजबूत कर दी जाए और उसके बाद नेतृत्व परिवर्तन स्वाभाविक रूप से हो। उन्होंने कहा कि अब यह चरण पूरा हो चुका है और कंपनी अगले स्तर के विकास के लिए तैयार है।

उत्तराधिकारी की तलाश जारी

एयर इंडिया ने अप्रैल में विल्सन के इस्तीफे की घोषणा की थी। कंपनी ने नए सीईओ की नियुक्ति के लिए एक समिति गठित की है। नए नेतृत्व की नियुक्ति तक वह अपने पद पर बने रहेंगे।

पिछले कुछ वर्षों में एयर इंडिया को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिनमें 2025 में ड्रीमलाइनर विमान दुर्घटना, पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र के बंद होने से उड़ानों पर असर और बढ़ती परिचालन लागत शामिल हैं। इसके बावजूद एयरलाइन ने अपने पुनर्गठन और सुधार कार्यक्रम को आगे बढ़ाया।

Articles you may like: