🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

दुनिया की ‘फार्मेसी’ बनने की ओर भारत, पांच साल में दोगुना हो सकता है दवा उद्योग

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल बोले- 60 अरब डॉलर का भारतीय फार्मा क्षेत्र तेज विस्तार की राह पर।

By श्वेता सिंह

Jun 09, 2026 12:36 IST

नई दिल्लीः भारत का दवा उद्योग आने वाले वर्षों में वैश्विक स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में और अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाने की तैयारी में है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने विश्वास जताया है कि वर्तमान में लगभग 60 अरब डॉलर का भारतीय फार्मास्युटिकल उद्योग अगले पांच वर्षों में दोगुना आकार हासिल कर सकता है।

उन्होंने यह बात भारत की प्रमुख फार्मा और हेल्थकेयर प्रदर्शनी आईफेक्स 2025 (IPHEX 2025) के दौरान आयोजित फार्मास्युटिकल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल की ग्लोबल एंबेसडर्स मीट में कही। गोयल ने कहा कि भारतीय दवा उद्योग की वैश्विक पहचान तीन प्रमुख स्तंभों-भरोसा, नवाचार और साझेदारी पर आधारित है।

वैश्विक भरोसे का केंद्र बन चुका है भारत

गोयल ने कहा कि भारत ने अपने गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज (GMP) मानकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुरूप बनाया है। आज विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की कुल वैक्सीन जरूरत का लगभग 65 से 70 प्रतिशत उत्पादन भारत में होता है।

उन्होंने बताया कि दुनिया के किसी भी देश की तुलना में भारत में सबसे अधिक अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (US FDA) से अनुमोदित विनिर्माण संयंत्र मौजूद हैं। इसके अलावा दुनिया की 25 प्रमुख जेनेरिक दवा कंपनियों में से 10 भारत से संचालित होती हैं।

नवाचार के दम पर नई ऊंचाइयों की तैयारी

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में देश में पेटेंट आवेदनों की संख्या लगभग दोगुनी हुई है। सरकार ने घरेलू अनुसंधान और नई दवा खोज को बढ़ावा देने के लिए ‘बायोफार्मा शक्ति’ पहल शुरू की है।

उन्होंने बताया कि विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए 10 अरब डॉलर का विशेष कोष बनाया गया है, जिसका लाभ फार्मा उद्योग को भी मिलेगा। गोयल के अनुसार भारत में कम परिचालन लागत के कारण यह निवेश विकसित देशों की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी साबित हो सकता है।

उन्होंने कहा कि भारत में वैश्विक स्तर की प्रतिभा अपेक्षाकृत कम लागत पर उपलब्ध है, जिससे दुनिया भर की कंपनियां यहां से अपने अनुसंधान और नवाचार कार्यक्रम संचालित कर सकती हैं।

वैश्विक कंपनियों को भारत आने का न्योता

गोयल ने अंतरराष्ट्रीय दवा कंपनियों से भारत में निवेश और उत्पादन इकाइयां स्थापित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ से अधिक उपभोक्ताओं वाला विशाल बाजार, तेजी से बढ़ता मध्यम वर्ग और दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था भारत को निवेश के लिए आकर्षक बनाती है।

उन्होंने बताया कि मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष में भारत की अर्थव्यवस्था ने स्थिर कीमतों पर 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जबकि वैश्विक स्तर पर कई चुनौतियां मौजूद थीं।

भारतीय जेनेरिक दवाओं की अहम भूमिका

गोयल ने कहा कि अमेरिका में बिकने वाली दवाओं की कुल मात्रा का लगभग 80 से 90 प्रतिशत हिस्सा जेनेरिक दवाओं का है और इनमें बड़ी संख्या भारत में निर्मित होती है।

उन्होंने कहा कि यदि भारत किफायती कीमतों पर जेनेरिक दवाएं उपलब्ध नहीं कराता, तो दुनिया के लाखों मरीजों की आवश्यक दवाओं तक पहुंच प्रभावित हो सकती थी। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत जेनेरिक दवाओं में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखते हुए उच्च मूल्य और नवाचारी दवा क्षेत्रों में भी तेजी से आगे बढ़ना चाहता है।

कोविड काल में निभाई वैश्विक जिम्मेदारी

कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीय दवा उद्योग की भूमिका का उल्लेख करते हुए गोयल ने कहा कि भारत ने केवल अपने नागरिकों की जरूरतों का ध्यान नहीं रखा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी दवाओं और टीकों की उपलब्धता सुनिश्चित की।

उन्होंने बताया कि 100 से अधिक देशों को भारत ने निःशुल्क दवाएं उपलब्ध कराईं। वहीं जिन देशों ने दवाएं खरीदीं, उन्हें भी महामारी से पहले वाली कीमतों पर आपूर्ति की गई। सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया कि कोई कारोबारी कृत्रिम कमी पैदा कर अनुचित मुनाफाखोरी न कर सके।

मुक्त व्यापार समझौतों से बढ़ा निर्यात का दायरा

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत का वैश्विक व्यापार नेटवर्क लगातार मजबूत हुआ है। वर्तमान में देश 50 से अधिक देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों के दायरे में है। मोदी सरकार के पिछले 12 वर्षों में नौ नए एफटीए पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

इन समझौतों के कारण विकसित देशों के बाजारों में भारतीय उत्पादों और सेवाओं, विशेषकर फार्मास्युटिकल उत्पादों को प्राथमिकता आधारित पहुंच मिल रही है। इससे भारत वैश्विक दवा आपूर्ति श्रृंखला का और महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है।

प्रतिनिधियों की नजर भारत की फार्मा क्षमता पर

आईफेक्स में एक हजार से अधिक प्रदर्शकों के शामिल होने की उम्मीद है। इसके अलावा कई देशों के व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी इस आयोजन में भाग ले रहे हैं। सम्मेलन के माध्यम से भारत अपनी फार्मा निर्माण क्षमता, अनुसंधान क्षमता और निर्यात संभावनाओं को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित कर रहा है।

Articles you may like: