नई दिल्लीः पिछले कुछ कारोबारी सत्रों की कमजोरी के बाद भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को मजबूत वापसी दर्ज की। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया, जिसके चलते बाजार खुलते ही प्रमुख सूचकांकों में तेजी देखने को मिली।
कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स 0.70 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,035.41 अंक पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी-50 0.59 प्रतिशत मजबूत होकर 23,259.05 अंक पर कारोबार करता दिखा।
अमेरिकी बाजारों की मजबूती का मिला सहारा
बैंकिंग और बाजार विशेषज्ञ अजय बग्गा के अनुसार, भारतीय बाजार में आई तेजी के पीछे घरेलू और वैश्विक दोनों तरह के कारक जिम्मेदार रहे। उन्होंने कहा कि अमेरिकी शेयर बाजारों में सोमवार को प्रौद्योगिकी और चिप कंपनियों से जुड़ी बिकवाली थमने के बाद निवेशकों की खरीदारी लौटी, जिससे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से जुड़े शेयरों में भी सकारात्मक माहौल बना।
अमेरिकी बाजार बढ़त के साथ बंद हुए, जिसका असर एशियाई बाजारों पर भी दिखाई दिया। कारोबार के दौरान डॉव जोन्स फ्यूचर्स में बढ़त दर्ज की गई, जबकि एसएंडपी 500 और नैस्डैक सूचकांक भी मजबूत रहे।
स्पेसएक्स आईपीओ और आईटी सेक्टर को लेकर बढ़ी उम्मीदें
अजय बग्गा ने बताया कि स्पेसएक्स के आईपीओ को निवेशकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। उनका मानना है कि इससे बाजार में तरलता को लेकर बनी चिंताएं कम हुई हैं और प्रौद्योगिकी शेयरों के प्रति निवेशकों का रुझान बेहतर हो सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी अदालत द्वारा ट्रंप प्रशासन के दौरान लागू किए गए एक लाख डॉलर के एच-1बी वीजा शुल्क को निरस्त किए जाने से भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयरों को समर्थन मिल सकता है।
पश्चिम एशिया से राहत, निवेशकों का भरोसा मजबूत
भू-राजनीतिक मोर्चे पर भी बाजार को राहत मिली। ईरान और इजरायल द्वारा संघर्ष विराम के समर्थन में सैन्य कार्रवाई रोकने की घोषणा ने वैश्विक निवेशकों की चिंता कम की है। इससे एशियाई बाजारों में जोखिम लेने की भावना मजबूत हुई और शेयरों में खरीदारी बढ़ी।
लगातार बिकवाली के बाद वापसी की उम्मीद
हाल के दिनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की बिकवाली के कारण भारतीय बाजार पर दबाव बना हुआ था। पिछले छह कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों ने 36,000 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की है। इसके बावजूद बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय बाजार फिलहाल अत्यधिक दबाव वाले स्तर पर पहुंच चुके हैं और तकनीकी आधार पर इनमें सुधार की संभावना बन रही है।
RBI के फैसले से बढ़ सकता है विदेशी निवेश
आरबीआई ने हाल ही में एफसीएनआर (बी) जमा योजना को समर्थन देने के लिए विदेशी मुद्रा विनिमय (फॉरेक्स) स्वैप सुविधा की घोषणा की है। बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस कदम से 40 से 50 अरब डॉलर तक की विदेशी मुद्रा भारत में आ सकती है, जिससे रुपये और वित्तीय बाजारों को मजबूती मिलेगी।
टेलीकॉम शेयरों में भी दिख सकती है हलचल
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि दूरसंचार क्षेत्र की कंपनियों में भी खरीदारी देखने को मिल सकती है। इसकी वजह हाल में आया वह न्यायिक फैसला है, जिसमें वर्ष 2012 में लगाए गए पूर्वव्यापी स्पेक्ट्रम शुल्क को अदालत ने निरस्त कर दिया है।
एशियाई बाजारों में भी तेजी
भारतीय बाजारों के साथ-साथ एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों में भी मजबूती देखी गई। जापान का निक्केई सूचकांक 1.73 प्रतिशत उछला, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी लगभग 5 प्रतिशत की शानदार बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा।
कच्चे तेल में गिरावट, सोना चमका
कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी रही। ब्रेंट क्रूड और अन्य कच्चे तेल बेंचमार्क में गिरावट दर्ज की गई। वहीं सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में सोने की कीमतों में बढ़त देखी गई, जिससे निवेशकों की सतर्कता भी झलकती है।
(समाचार एई समय कहीं भी निवेश करने की सलाह नहीं देता है। शेयर बाजार या किसी भी निवेश में जोखिम होता है। निवेश से पहले पूरी जानकारी और विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है। यह खबर केवल शिक्षा और जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।)