जमीन खोदते ही नीचे से भारी मात्रा में दवाईयां बाहर निकल रही हैं। डायमंड हार्बर की इस घटना से सनसनी मच गयी है। दवाईयों को बाहर निकालने के लिए अर्थ मूवर मशीन को लाना पड़ा है। आखिर कहां से इतनी दवाईयां आयी? किसने इन्हें मिट्टी में गाड़ा था?
क्या इस घटना के साथ कोई दवा तस्करी का गिरोह जुड़ा हुआ है? मामले की जांच के लिए घटनास्थल पर ड्रग कंट्रोल बोर्ड के सदस्य और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी पहुंच गए हैं। इसके साथ ही पारुलिया कोस्टल थाना की पुलिस ने भी जांच शुरू कर दी है।
स्थानीय भाजपा नेताओं का दावा है कि गोपनीय सूत्रों के आधार पर पुलिस और ब्लॉक प्रशासन ने जब हिंजाबेरिया गांव में निर्धारित एक स्थान पर खुदाई शुरू की तो जमीन के अंदर से भारी मात्रा में दवाईयां बाहर निकली।
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बाद में अर्थ मूवर मशीन मदद से खुदाई कर भारी मात्रा में दवाईयों को बाहर निकाला गया। स्थानीय लोगों का दावा है कि यहां खुदाई से निकली दवाईयों का बाजार मूल्य करोड़ों रुपयों में हो सकता है।
स्थानीय भाजपा नेता उत्तम बाग का कहना है कि बरामद दवाईयों में काफी की मियाद (Expiry Date) भी खत्म नहीं हुई है। करोड़ों रुपयों की दवाईयों को आम लोगों में वितरित न करके मिट्टी में दबा दिया गया है। भाजपा नेताओं का दावा है कि इन दवाईयों का संबंध 'सेवाश्रय' परियोजना के साथ भी हो सकता है।
वहीं स्थानीय एक निवासी का कहना है कि हमें जानकारी मिली थी कि लॉरी में लाकर यहां भारी मात्रा में दवाईयों को गाड़ दिया गया था। इसके बाद ही हमने इस बारे में प्रशासन को जानकारी दी। इसके पीछे कोई बड़ा गिरोह सक्रिय हो सकता है।