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भारत में जन्मे निखिल चौधरी ऑस्ट्रेलिया के लिए रच सकते हैं इतिहास, अंतरराष्ट्रीय पदार्पण के करीब

60 साल बाद भारत में जन्मा कोई खिलाड़ी पहन सकता है ऑस्ट्रेलियाई जर्सी।

कैनबरा : दिल्ली में जन्मे ऑलराउंडर निखिल चौधरी ऑस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने के बेहद करीब हैं। यदि उन्हें बांग्लादेश दौरे पर खेलने का मौका मिलता है, तो वे 60 वर्षों से भी अधिक समय बाद भारत में जन्मे पहले पुरुष क्रिकेटर बन जाएंगे जो ऑस्ट्रेलिया की सीनियर राष्ट्रीय टीम की जर्सी पहनकर मैदान पर उतरेंगे।

भारत में पले-बढ़े निखिल चौधरी की जिंदगी कोरोना महामारी के दौरान अचानक बदल गई थी। उस कठिन दौर के बाद उन्होंने जिस तरह संघर्ष करते हुए खुद को स्थापित किया, वह अब उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के दरवाजे तक ले आया है।

हाल ही में निखिल इंडियन प्रीमियर लीग में दिल्ली कैपिटल्स का हिस्सा थे। इसके बाद उन्होंने बेल्जियम की ईयूटी20 प्रतियोगिता में जेबी ब्रूज की ओर से हिस्सा लिया। अब उन्हें बांग्लादेश के खिलाफ तीन मैचों की टी-20 श्रृंखला के लिए ऑस्ट्रेलियाई टीम में शामिल किया गया है।

ऑस्ट्रेलिया की जर्सी में पदार्पण की दहलीज पर

विभिन्न प्रतियोगिताओं में लगातार शानदार प्रदर्शन का इनाम निखिल को राष्ट्रीय टीम में चयन के रूप में मिला है। होबार्ट हरिकेन्स के इस ऑलराउंडर को शुक्रवार को ढाका में ऑस्ट्रेलियाई टीम से जुड़ना है।

बांग्लादेश के खिलाफ चटगांव में खेले जाने वाले टी-20 मुकाबलों में अंतिम एकादश में जगह बनाने के लिए उन्हें जोएल डेविस और आरोन हार्डी से प्रतिस्पर्धा करनी होगी। दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया के कप्तान मिचेल मार्श टखने की चोट से धीरे-धीरे उबर रहे हैं। हालांकि जानकारी के अनुसार वह इस श्रृंखला में टीम की कप्तानी करेंगे।

ऑस्ट्रेलिया के चयनकर्ता टोनी डोडेमेड ने निखिल की प्रशंसा करते हुए कहा कि विशेष रूप से पिछले सत्र में बिग बैश लीग में उनका प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा। इसी वजह से उन्हें टीम में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश दौरे से निखिल को काफी कुछ सीखने का अवसर मिलेगा और अगले सप्ताह पहले टी-20 मुकाबले के लिए टीम चयन के दौरान उनके नाम पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।

दिल्ली से ऑस्ट्रेलियाई टीम तक का सफर

भारतीय मूल के गुरिंदर संधू और तनवीर संघा पहले भी ऑस्ट्रेलिया के लिए खेल चुके हैं। लेकिन भारत में जन्मा कोई पुरुष क्रिकेटर 1960 के दशक के बाद ऑस्ट्रेलिया की सीनियर टीम के लिए नहीं खेला है।

आखिरी बार 1964 में गुजरात में जन्मे रेक्स सेलर्स ने ऑस्ट्रेलिया का प्रतिनिधित्व किया था। ऐसे में निखिल चौधरी के पास एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज कराने का अवसर है।

दिल्ली में जन्मे निखिल ने क्रिकेट की शुरुआती शिक्षा भारत में ही प्राप्त की। उन्होंने पंजाब के लिए घरेलू क्रिकेट खेला और इस दौरान हरभजन सिंह, शुभमन गिल और अभिषेक शर्मा जैसे खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा किया। वह इंडियन प्रीमियर लीग में मुंबई इंडियंस के साथ भी जुड़े रहे हैं।

संघर्ष से सफलता तक की कहानी

एक समय निखिल क्वींसलैंड घूमने गए थे, लेकिन कोरोना महामारी के कारण वहीं फंस गए। यही घटना उनके जीवन का निर्णायक मोड़ साबित हुई और उनकी पूरी जिंदगी बदल गई।

हालांकि ऑस्ट्रेलिया में शुरुआती दिन बिल्कुल आसान नहीं थे। वहां रहने के लिए उन्हें डिलीवरी का काम करना पड़ा। उन्होंने एक रेस्तरां में भी नौकरी की। काम के दौरान उनकी उंगली में चोट भी लगी, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने क्रिकेटर बनने का सपना नहीं छोड़ा।

धीरे-धीरे उनकी प्रतिभा लोगों की नजर में आने लगी। ग्रेड क्रिकेट के कोच जेम्स होप्स की सिफारिश पर उन्हें होबार्ट हरिकेन्स में मौका मिला। इसके बाद उनका क्रिकेट करियर तेजी से आगे बढ़ा।

उन्होंने टीम के साथ बिग बैश लीग का खिताब जीता और बल्ले से भी प्रभावशाली प्रदर्शन किया। बाद में उन्हें तस्मानिया की राज्य टीम के साथ अनुबंध मिला।

शेफील्ड शील्ड में उन्होंने एक शतक लगाने के साथ-साथ एक पारी में पांच विकेट लेने का कारनामा भी किया। स्पिन गेंदबाजी के अनुकूल परिस्थितियों में खेलने और विकसित होने का उनका अनुभव चयनकर्ताओं को विशेष रूप से प्रभावित कर चुका है।

इसी वजह से अब निखिल चौधरी बांग्लादेश के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया की जर्सी में ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय पदार्पण करने के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। यदि उन्हें मौका मिलता है, तो उनका नाम ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के इतिहास में एक विशेष उपलब्धि के साथ दर्ज हो जाएगा।

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