नई दिल्ली : देश में एक बार फिर निपाह वायरस को लेकर दहशत का माहौल बन गया है। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में केरल के कोझिकोड जिले के फेरोके क्षेत्र के एक व्यक्ति के शरीर में निपाह वायरस की उपस्थिति पाई गई है। यह मरीज वर्तमान में कोझिकोड के सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में उपचाराधीन है और वहीं उसे क्वारंटाइन में रखा गया है।
डॉक्टरों के अनुसार उसकी स्थिति फिलहाल स्थिर बनी हुई है, हालांकि अंतिम पुष्टि के लिए पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जो गुरुवार को मिलने की संभावना है। इस मामले के सामने आने के बाद पूरे राज्य में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
सूत्रों के अनुसार संक्रमित व्यक्ति सबसे पहले केरल के एक निजी अस्पताल में उपचार के लिए गया था, जहां वह आउटपेशेंट विभाग में पहुंचा और अस्पताल के विभिन्न हिस्सों में भी गया। इसके चलते स्वास्थ्य अधिकारियों को आशंका है कि वह कई लोगों के संपर्क में आया होगा।
चिकित्सकों को संदेह है कि किसी गोदाम की सफाई के दौरान यह व्यक्ति निपाह वायरस से संक्रमित हुआ होगा, हालांकि संक्रमण के वास्तविक स्रोत की अभी तक पुष्टि नहीं हो पाई है। स्थिति की समीक्षा और आगे की रणनीति तय करने के लिए गुरुवार को कोझिकोड में एक मेडिकल बोर्ड की बैठक बुलाई गई है। इसके अलावा कोझिकोड के जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में एक अलग समीक्षा बैठक भी आयोजित की जाएगी, जिसमें कंटेनमेंट ज़ोन घोषित करने और अन्य प्रतिबंध लगाने पर निर्णय लिया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग ने संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए लोगों की पहचान करने का काम शुरू कर दिया है। केरल के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने कहा है कि मरीज कई लोगों के संपर्क में आया है, लेकिन फिलहाल घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। एहतियात के तौर पर अस्पताल के उन कर्मचारियों को क्वारंटाइन में रहने का निर्देश दिया गया है, जो मरीज के संपर्क में आए थे। स्थिति की समीक्षा के लिए गुरुवार को तिरुवनंतपुरम में स्वास्थ्य मंत्री के कार्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय बैठक भी आयोजित की गई है।
गौरतलब है कि इससे पहले इस वर्ष की शुरुआत में पश्चिम बंगाल में भी निपाह वायरस को लेकर चिंता फैल गई थी, जब दो नर्सों में संक्रमण की पुष्टि हुई थी। उनमें से एक की मृत्यु हो गई थी जबकि दूसरी अब स्वस्थ हो चुकी है।