भारत ने पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच अपनी पारंपरिक संतुलित और सतर्क विदेश नीति को जारी रखा है। क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष और समुद्री सुरक्षा से जुड़े जोखिमों के बावजूद भारत ने न तो किसी पक्ष के साथ खुलकर टकराव का रास्ता अपनाया है और न ही अपने रणनीतिक हितों से समझौता किया है। खासकर खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक हितों को देखते हुए भारत लगातार वॉशिंगटन और तेहरान दोनों के साथ संवाद बनाए रखने की कोशिश करता रहा है।
हाल ही में ओमान के तट के पास एक कमर्शियल जहाज “सेटेबेल्लो” पर हुए हमले के बाद स्थिति और गंभीर हो गई। इस जहाज पर कुल 24 भारतीय क्रू सदस्य सवार थे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इनमें से 21 भारतीयों को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि 3 अभी भी लापता हैं। भारतीय दूतावास ओमान के अधिकारियों के साथ मिलकर लगातार खोज और बचाव अभियान पर नजर रखे हुए है और समन्वय कर रहा है।
विदेश मंत्रालय ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों पर लगातार हो रहे हमले गंभीर चिंता का विषय हैं। मंत्रालय ने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाएं सीधे तौर पर क्षेत्र में जारी तनाव और संघर्ष का परिणाम हैं। भारत ने एक बार फिर सभी पक्षों से तनाव कम करने और कूटनीतिक समाधान की दिशा में गंभीर प्रयास करने की अपील की है, ताकि इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल हो सके। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर नागरिक जहाजों और वाणिज्यिक ढांचे को निशाना बनाना अस्वीकार्य है और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार मुक्त और सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
इस घटना के बाद विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव ने अमेरिकी चार्ज डी’अफेयर्स को तलब भी किया, जिससे भारत की गंभीर चिंता और कूटनीतिक सक्रियता का संकेत मिलता है।
इस बीच, समुद्री सुरक्षा से जुड़ी ब्रिटिश फर्म एम्ब्रे ने इस हमले को उस व्यापक पैटर्न से जोड़कर देखा है, जो हाल के महीनों में क्षेत्र में उभरता दिख रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे कई ऑपरेशनों में क्रू को हमले से पहले जहाज के अलग हिस्सों में भेजने जैसी रणनीति अपनाई गई है। हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड की ओर से इस मामले पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई।
गौरतलब है कि यह कोई अलग-थलग घटना नहीं है। मार्च की शुरुआत से ही खाड़ी और आसपास के समुद्री मार्गों में कई कमर्शियल जहाजों पर हमले दर्ज किए गए हैं। इनमें संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और ओमान के पास हुई घटनाएं शामिल हैं। कुछ मामलों में टैंकरों को भी निशाना बनाया गया है, जिससे क्षेत्र में शिपिंग सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हो रहे इन हमलों ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है।