चंडीगढ़ः पंजाब सरकार ने बोर्ड परीक्षाओं में मेरिट और रैंक निर्धारण को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अब बोर्ड परीक्षाओं में यदि दो या अधिक विद्यार्थियों के अंक समान आते हैं तो उनकी रैंक तय करने के लिए जन्मतिथि का सहारा नहीं लिया जाएगा। सभी विद्यार्थियों को समान रैंक प्रदान की जाएगी। राज्य सरकार का मानना है कि शैक्षणिक उपलब्धि का मूल्यांकन केवल प्रदर्शन के आधार पर होना चाहिए, न कि उम्र के आधार पर।
यह बदलाव विद्यार्थियों से मिले सुझावों के बाद किया गया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के समक्ष छात्रों ने समान अंक होने पर जन्मतिथि के आधार पर रैंक तय किए जाने पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद सरकार ने नियमों की समीक्षा कर नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया।
अब टाई की स्थिति में नहीं होगा कोई भेदभाव
राज्य के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने स्पष्ट किया कि नई व्यवस्था का उद्देश्य सभी विद्यार्थियों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करना है। पहले समान अंक प्राप्त करने वाले छात्रों में उम्र के आधार पर किसी एक को बेहतर रैंक मिल जाती थी, जिससे कई बार विवाद और असंतोष पैदा होता था। अब ऐसा नहीं होगा और सभी समान अंकधारकों को एक ही रैंक दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि यह कदम परीक्षा परिणामों को अधिक न्यायसंगत और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में उठाया गया है।
बोर्ड परीक्षाओं का स्वरूप भी बदलेगा
राज्य सरकार केवल रैंकिंग प्रणाली तक ही सीमित नहीं रहना चाहती। शिक्षा विभाग ने परीक्षा पद्धति में भी व्यापक बदलाव की घोषणा की है। आने वाले समय में प्रश्नपत्रों को इस तरह तैयार किया जाएगा कि वे विद्यार्थियों की सोचने, समझने और विश्लेषण करने की क्षमता को परखें।
शिक्षा मंत्री के अनुसार, लंबे समय से चली आ रही रटकर परीक्षा पास करने की प्रवृत्ति को समाप्त करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम होगा। नई प्रणाली में दक्षता-आधारित और अवधारणात्मक प्रश्नों का अनुपात बढ़ाया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों को विषय की वास्तविक समझ विकसित करने के लिए प्रेरित किया जा सके।
नकल और पेपर लीक के खिलाफ सख्त संदेश
सरकार ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को मजबूत बनाने के लिए नकल और प्रश्नपत्र लीक जैसी समस्याओं पर भी कड़ा रुख अपनाया है। शिक्षा विभाग का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित, पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए कठोर निगरानी तंत्र विकसित किया जाएगा।
अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी स्तर पर अनियमितता की गुंजाइश न रहे और विद्यार्थियों का विश्वास परीक्षा व्यवस्था में बना रहे।
शिक्षा गुणवत्ता में पंजाब की मजबूत दावेदारी
इधर, शिक्षा के क्षेत्र में पंजाब की उपलब्धियों को राष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता मिल रही है। हाल ही में जारी नीति आयोग की एजुकेशन क्वालिटी रिपोर्ट 2026 में राज्य ने कई महत्वपूर्ण शैक्षणिक मानकों पर उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कक्षा 3 के विद्यार्थियों में भाषा दक्षता के मामले में पंजाब ने 82 प्रतिशत का स्तर हासिल किया, जबकि गणित में यह आंकड़ा 78 प्रतिशत रहा। तुलना में केरल के विद्यार्थियों का प्रदर्शन भाषा में 75 प्रतिशत और गणित में 70 प्रतिशत दर्ज किया गया।
इसी तरह कक्षा 9 गणित में भी पंजाब ने 52 प्रतिशत दक्षता के साथ बढ़त बनाई, जबकि केरल 45 प्रतिशत पर रहा।
‘शिक्षा में पंजाब का नया दौर शुरू’
इन उपलब्धियों पर प्रतिक्रिया देते हुए शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि राज्य में शिक्षा सुधारों का असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। उन्होंने इसे "पंजाब के शिक्षा युग" की शुरुआत बताते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार, शैक्षणिक सुधारों का लगातार क्रियान्वयन और शिक्षकों की प्रतिबद्धता ने सकारात्मक परिणाम दिए हैं।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों के संयुक्त प्रयासों ने पंजाब को देश के अग्रणी शिक्षा राज्यों में शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकार का लक्ष्य अब केवल बेहतर परिणाम हासिल करना नहीं, बल्कि ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करना है जो विद्यार्थियों को प्रतिस्पर्धी और भविष्य के लिए सक्षम बना सके।