इंदौर: बढ़ती ईंधन कीमतों और किफायती परिवहन की जरूरत के बीच इंदौर की महिला मैकेनिकों ने एक नई मिसाल पेश की है। एक स्वयंसेवी संस्था से जुड़ी पांच महिलाओं ने आईआईटी बॉम्बे के तकनीकी सहयोग से एक इलेक्ट्रिक साइकिल विकसित की है, जिसे ‘यांत्रिका’ नाम दिया गया है।
विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित एक कार्यक्रम में इस ई-साइकिल का अनावरण किया गया। इसे खासतौर पर रोजमर्रा के आवागमन को सस्ता और आसान बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
इस परियोजना से जुड़े ‘समान सोसाइटी’ के निदेशक राजेंद्र बंधु ने बताया कि संस्था की पांच महिला मैकेनिकों ने इस ई-साइकिल को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस दौरान आईआईटी बॉम्बे के सेंटर फॉर टेक्नोलॉजी अल्टरनेटिव्स फॉर रूरल एरियाज (सी-टारा) ने तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई।
उन्होंने बताया कि प्रोफेसर सतीश अग्निहोत्री और उनकी टीम ने शुरुआत से ही तकनीकी मार्गदर्शन दिया। लगभग छह महीने तक विभिन्न चरणों में परीक्षण किए गए, जिसके बाद ई-साइकिल के तीन मॉडलों को स्वीकृति प्रदान की गई।
परियोजना को मिली सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आईआईटी बॉम्बे ने अपने परिसर में उपयोग के लिए 10 ई-साइकिलों का ऑर्डर भी दिया है।
राजेंद्र बंधु के अनुसार वर्तमान में एक ई-साइकिल तैयार करने की लागत करीब 32 हजार रुपये है। हालांकि बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू होने पर इसकी कीमत घटकर लगभग 25 हजार रुपये तक पहुंच सकती है, जिससे यह आम उपभोक्ताओं के लिए और अधिक सुलभ हो जाएगी।
उन्होंने बताया कि ‘यांत्रिका’ एक बार बैटरी चार्ज होने पर करीब 30 किलोमीटर तक चल सकती है, जो शहरी और आसपास के क्षेत्रों में दैनिक यात्रा के लिए पर्याप्त है।
संस्था से जुड़ी मैकेनिक सपना जाधव ने कहा कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और श्रमिक वर्ग को सस्ता तथा सुविधाजनक परिवहन विकल्प उपलब्ध कराना है। उनके अनुसार यह ई-साइकिल महिलाओं को कार्यस्थल तक जल्दी पहुंचने में मदद करेगी और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के दौर में मध्यम एवं निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए किफायती विकल्प साबित हो सकती है।
उन्होंने कहा कि यह परियोजना केवल एक परिवहन साधन नहीं, बल्कि महिलाओं की तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता का भी उदाहरण है।