पिछले कुछ सालों के दौरान घर से लेकर ऑफिस और दुकानों तक में एयर कंडिशन (AC) का इस्तेमाल काफी बढ़ गया है। हमारी तेजी से बदलती और जलवायु में AC अब कोई विलासिता नहीं बल्कि लगभग एक आवश्यकता बन चुकी है। भीषण तपिश और लू में AC किसी वरदान से कम नहीं है। तापमान का पारा जब 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाकर हिट वेव पैदा करता है तब उससे बचने का एकमात्र तरीका AC ही नजर आता है।
लेकिन क्या आप जानती हैं लगातार बनावटी ठंडक के संपर्क में रहने की वजह से न सिर्फ त्वचा रूखी और बेजान हो जाती है बल्कि फाइन लाइंस, चेहरे की रंगत का फीका पड़ना, बालों का कमजोर होना और हर समय थकान महसूस होने जैसी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं?
ब्यूटी एक्सपर्ट शहनाज हुसैन कहती हैं कि जो मशीन भीषण गर्मी से हमें बचाती है वही धीरे-धीरे हमारे स्वास्थ्य और जीवनशैली को ऐसे तरीकों से प्रभावित करने लग सकती है। कई बार लोग अनजाने में ही 'सिक बिल्डिंग सिंड्रोम' के शिकार हो जाते हैं, जो खराब वायु संचार और अपेक्षाकृत कम ऑक्सीजन स्तर के कारण उत्पन्न हो सकता है।
कृत्रिम ठंडक से घटती है रोग प्रतिरोधक क्षमता
एयर कंडीशनर पर लगातार निर्भरता शरीर की तापमान परिवर्तन के अनुसार खुद को ढालने की प्राकृतिक क्षमता को कमजोर कर सकती है। एयर कंडीशनर वाले ठंडे वातावरण और बाहर की गर्मी के बीच बार-बार होने वाले तेज तापमान बदलाव से 'समर कोल्ड' जैसी स्थिति और मांसपेशियों में जकड़न हो सकती है जिससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता और पूरा स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है।
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एसी सिस्टम हवा की नमी को कम कर देते हैं और ठंडा वातावरण बनाते हैं जिससे शरीर से नमी खिंच जाती है। इसके कारण त्वचा में गंभीर रूखापन, जलन और नाजुकता पैदा हो सकती है।
यह स्थिति त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा परत को नुकसान पहुंचाती है। इसकी वजह से त्वचा पर पपड़ी उतरना, खुजली और त्वचा का फटना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। साथ ही बाल सूखे, बेजान और कमजोर हो सकते हैं तथा नाखून भी तुरंत टूटने लगते हैं।
एयर कंडीशनर सिर्फ हवा को ठंडा नहीं करता बल्कि हवा से नमी को भी हटा देता है। इसका जैविक प्रभाव पड़ता है। जब त्वचा में पानी की मात्रा कम हो जाती है तो वह रूखी, खिंची हुई और खुरदरी महसूस होने लगती है। जब घर के अंदर की हवा अत्यधिक शुष्क हो जाती है।
इसकी वजह से त्वचा थकी हुई, बेजान और खिंची हुई दिखने लगती है खासकर चेहरे की सफाई के बाद। शुष्कता त्वचा को सिकोड़ देती है जिससे महीन रेखाएँ और झुर्रियाँ अधिक स्पष्ट दिखने लगती हैं।
AC एक्ने
AC हवा से नमी को कम करके त्वचा को शुष्क कर सकती है। इससे त्वचा में डिहाइड्रेशन हो जाता है। इसके कारण त्वचा की सेबेशियस ग्रंथियां अधिक मात्रा में सीबम बनाने लगती हैं, जिससे रोमछिद्र बंद हो सकते हैं, सूजन बढ़ सकती है और मुंहासों की समस्या हो सकती है।
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यह समस्या ड्राई और ऑयली दोनों प्रकार की त्वचा में हो सकती है। यह असंतुलन एक ऐसे चक्र को जन्म दे सकता है, जिसमें त्वचा एक साथ सूखी भी महसूस होती है और तैलीय भी। इससे स्किन केयर को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है। तेल के अत्यधिक उत्पादन के कारण ब्लैकहेड्स, व्हाइटहेड्स और सूजन जैसी अन्य त्वचा समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं, जिसे अक्सर 'AC एक्ने' कहा जाता है।
समय से पहले उम्र का बढ़ा
लगभग 12 घंटे तक AC में रहने से त्वचा की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया तेज हो सकती है। ठंडी और शुष्क हवा त्वचा की लचक को कम कर देती है, जिससे त्वचा सिकुड़ने, ढीली पड़ने और महीन रेखाएं विकसित होने की संभावना बढ़ जाती है। समय के साथ, लगातार शुष्क हवा के संपर्क में रहने से झुर्रियां और त्वचा का ढीलापन अधिक स्पष्ट हो सकता है।
AC त्वचा से नमी हटा देती है तो त्वचा अपनी प्राकृतिक कोमलता और लचीलापन खो देती है। इससे उम्र बढ़ने के शुरुआती संकेत अधिक दिखाई देने लगते हैं। झुर्रियां और महीन रेखाएं अधिक स्पष्ट रूप से उभर सकती हैं।
कैसे रखें बालों और त्वचा का ख्याल?
AC का त्वचा, बाल और शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है, यह समझकर और कुछ छोटे लेकिन नियमित बदलाव करके आप गर्म जलवायु के बावजूद अपनी त्वचा की जवानी और स्वस्थ, चमकदार रूप को बनाए रख सकती हैं। शरीर को हाइड्रेटेड रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी, सूप, जूस आदि का सेवन करें। बेहतर सेलुलर अवशोषण के लिए प्रति लीटर पानी में एक चुटकी नमक मिलाया जा सकता है।
कभी-कभी इलेक्ट्रोलाइट्स का सेवन भी अवशोषण को बेहतर बनाने में मदद करता है। बेरीज, ग्रीन टी, डार्क चॉकलेट और हरी पत्तेदार सब्जियां एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती हैं जो AC के कारण होने वाले त्वचा के नुकसान से सुरक्षा प्रदान कर सकती हैं।
कमरे का तापमान 23 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रखना चाहिए जिससे आराम भी मिलता है और त्वचा पर अत्यधिक ठंड का असर भी नहीं पड़ता। हर कुछ घंटों में मॉइस्चराइजर, लिप बाम या हैंड क्रीम लगाना भी जरूरी है।