लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को कहा कि राज्य में पर्यटन विकास केवल बुनियादी ढांचे के निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका उद्देश्य सांस्कृतिक पुनर्जागरण, रोजगार सृजन, स्थानीय आर्थिक विकास और वैश्विक पहचान सुनिश्चित करना होना चाहिए।
पर्यटन विभाग की कार्यप्रणाली की समीक्षा के लिए अधिकारियों के साथ आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश केवल आस्था का केंद्र ही नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक परंपराओं और ज्ञान विरासत का प्रतिनिधि भी है।
उन्होंने कहा, "राज्य में पर्यटन विकास को केवल बुनियादी ढांचे के निर्माण तक सीमित रखने के बजाय इसे सांस्कृतिक पुनर्जागरण, रोजगार सृजन, स्थानीय आर्थिक विकास और वैश्विक पहचान से जोड़ा जाना चाहिए।"
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन राज्य की सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है और इससे स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प, पारंपरिक कलाओं, भोजन और सेवा क्षेत्र के लिए व्यापक अवसर उपलब्ध हो सकते हैं।
‘ज्ञान भारतम मिशन’ की समीक्षा करते हुए, जिसका उद्देश्य भारत की ज्ञान परंपराओं का संरक्षण करना है, योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्राचीन पांडुलिपियाँ देश की सभ्यता, दर्शन, विज्ञान और सांस्कृतिक चेतना को दर्शाने वाली अमूल्य धरोहर हैं।
उन्होंने कहा कि इनका संरक्षण और डिजिटलीकरण केवल अभिलेखीय कार्य नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों को उनकी जड़ों से जोड़ने का माध्यम है।
अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी कि इस पहल के तहत अब तक 13.7 लाख से अधिक पांडुलिपियों का सर्वेक्षण, डिजिटलीकरण और संरक्षण किया जा चुका है।
पर्यटन नीति-2022 में प्रस्तावित संशोधनों की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को निवेश, नवाचार और अनुभव-आधारित पर्यटन के प्रमुख गंतव्य के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। बैठक में नए पर्यटन सर्किट विकसित करने पर चर्चा हुई, जिनमें नीम करौली बाबा सर्किट और बुंदेलखंड किला सर्किट शामिल हैं।
बैठक में ‘परंपरा’ पहल के तहत हेरिटेज अनुभव केंद्र, कृषि-पर्यटन और वाइनयार्ड पर्यटन जैसी नई अवधारणाओं को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन नीति निवेश आकर्षित करे, रोजगार पैदा करे और पर्यटकों को अनूठे अनुभव प्रदान करे।
लखनऊ में हाल ही में उद्घाटित नेवी शौर्य वाटिका और निर्माणाधीन आईएनएस गोमती शौर्य संग्रहालय की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना युवा पीढ़ी को देशभक्ति, सैन्य शौर्य और भारत की समुद्री विरासत से परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी। उन्होंने कहा कि इस सुविधा का संचालन लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने आगरा में निर्माणाधीन छत्रपति शिवाजी महाराज संग्रहालय की भी समीक्षा की और कहा कि युवा पीढ़ी को राष्ट्रीय नायकों की प्रेरणादायक कहानियों से अवगत कराना राष्ट्रीय जिम्मेदारी है।
उन्होंने निर्देश दिया कि संग्रहालय में मराठा साम्राज्य और उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक संबंध, अहिल्याबाई होलकर द्वारा काशी विश्वनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण में भूमिका, राज्य की सांस्कृतिक विरासत, स्वतंत्रता सेनानियों और ब्रज संस्कृति को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाए।
नैमिषारण्य के समग्र विकास की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह स्थल केवल तीर्थ नहीं है, बल्कि भारत की वैदिक ज्ञान परंपरा, आध्यात्मिक साधना और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत केंद्र है।
उन्होंने इसके विकास में धार्मिक आस्था, पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक सुविधाओं के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया।
अधिकारियों ने बताया कि मास्टर प्लान के तहत प्रस्तावित परियोजनाओं में वैदिक विज्ञान केंद्र, वेलनेस और वैदिक थीम पार्क, रिवरफ्रंट विकास, तीर्थयात्री आवास, व्याख्या केंद्र और अन्य पर्यटन सुविधाएँ शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विकास योजना को मिशन मोड में लागू किया जाए।
मिर्जापुर-विंध्याचल क्षेत्र के एकीकृत मास्टर प्लान की समीक्षा करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विंध्यवासिनी धाम देश के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है और इसकी विकास योजना भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की जानी चाहिए।
उन्होंने निर्देश दिया कि देवी सती से जुड़ी पौराणिक कथाओं को प्रमुख शक्तिपीठों के पास प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जाए और इसके लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी पर भी विचार किया जाए। चित्रकूट स्थित प्राचीन सोमनाथ मंदिर में संरक्षण और पुनर्स्थापन कार्यों की भी बैठक में समीक्षा की गई