नई दिल्लीः संसदीय वित्त संबंधी स्थायी समिति ने सरकारी पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) में लगातार वृद्धि के बावजूद निजी निवेश की अपेक्षित गति न पकड़ पाने पर चिंता व्यक्त की है। समिति के अध्यक्ष और लोकसभा सांसद भर्तृहरि महताब ने कहा कि यह भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने प्रमुख चुनौतियों में से एक बना हुआ है।
समिति की बैठक में मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन सहित वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में आर्थिक वृद्धि, महंगाई, विदेशी निवेश, वैश्विक परिस्थितियों और भारत पर उनके प्रभावों की समीक्षा की गई।
बैठक के प्रमुख मुद्दे
सरकारी पूंजीगत निवेश बढ़ रहा है, लेकिन निजी निवेश समान गति से नहीं बढ़ रहा।
चीन से उत्पादन आधार स्थानांतरित करने वाली कंपनियों को भारत में आकर्षित करने पर चर्चा।
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के साथ पूंजी निकासी की प्रवृत्ति पर चिंता।
पश्चिम एशिया के तनाव और महंगाई के संभावित प्रभावों की समीक्षा।
रुपये की स्थिति और उस पर नियंत्रण के लिए उठाए जा रहे कदमों पर चर्चा।
भर्तृहरि महताब ने कहा कि चीन से बाहर जाने वाली कंपनियों को भारत में उद्योग स्थापित करने के लिए किस प्रकार का सहयोग दिया जाए, इस पर नीतिगत स्तर पर विचार आवश्यक है। उन्होंने चीन द्वारा हाल में अपने उद्योगों की सुरक्षा के लिए लागू किए गए कड़े कानूनों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था के कई संकेतक सकारात्मक हैं। पिछले वर्ष की तुलना में घरेलू बचत बढ़ी है और निवेश गतिविधियों में भी सुधार दिखाई दे रहा है।
एफडीआई को लेकर समिति की चिंता
भारत में बड़ी मात्रा में एफडीआई आ रहा है।
इसके साथ ही विदेशी निवेश की निकासी भी देखी जा रही है।
मुख्य आर्थिक सलाहकार के अनुसार यह चक्रीय प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है।
विकसित अर्थव्यवस्थाएं, विशेषकर अमेरिका, वैश्विक निवेश को आकर्षित कर रही हैं।
जापान सहित कई विकसित देशों में ब्याज दरों में वृद्धि से पूंजी प्रवाह प्रभावित हो रहा है।
महताब ने कहा कि अमेरिका इस समय बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश आकर्षित कर रहा है, जबकि विकसित देशों में बेहतर रिटर्न मिलने के कारण निवेश का रुख वहां की ओर बढ़ रहा है।
पश्चिम एशिया के संघर्ष से महंगाई बढ़ने की आशंकाओं पर उन्होंने कहा कि सरकार ने संभावित प्रभावों से निपटने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं और इसके लिए वित्तीय प्रावधान भी किए गए हैं। रुपये की स्थिति पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कदम उठा रहा है।
समिति इस महीने के तीसरे सप्ताह में दोबारा बैठक करेगी। इसके बाद एक रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसमें आर्थिक चुनौतियों के साथ-साथ सरकार के लिए संभावित नीतिगत सुझाव भी शामिल होंगे।