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पेट्रोल-डीजल कीमतों में उछाल से महंगाई बढ़ने का खतरा, Crisil ने जताई चिंता

परिवहन लागत बढ़ने से खाने-पीने से लेकर उद्योग तक पर असर, आने वाले महीनों में कीमतों में तेजी की आशंका।

By श्वेता सिंह

Jun 02, 2026 16:24 IST

नई दिल्लीः देश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतें आने वाले समय में महंगाई को दोबारा रफ्तार दे सकती हैं। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने मंगलवार को जारी रिपोर्ट में कहा कि ईंधन महंगा होने का असर सीधे तौर पर परिवहन और उत्पादन लागत पर पड़ेगा, जो अंततः उपभोक्ता कीमतों में वृद्धि के रूप में सामने आएगा।

ईंधन कीमतों में तेज बढ़ोतरी

रिपोर्ट के अनुसार, 15 मई के बाद से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यदि वैश्विक कच्चा तेल महंगा बना रहता है तो यह वृद्धि आगे बढ़कर 10 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती है।

क्रिसिल ने अनुमान लगाया है कि 7.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से खुदरा महंगाई सूचकांक (CPI) पर लगभग 36 आधार अंक का असर होगा, जबकि 10 रुपये की बढ़ोतरी होने पर यह प्रभाव करीब 48 आधार अंक तक पहुंच सकता है।

लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन पर दबाव

रिपोर्ट में कहा गया है कि सड़क परिवहन, जो देश की कुल माल ढुलाई का लगभग 71 प्रतिशत संभालता है, ईंधन लागत में वृद्धि से सबसे अधिक प्रभावित होगा। ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों की लागत में ईंधन का हिस्सा लगभग 42 प्रतिशत होता है, जिससे माल ढुलाई महंगी हो जाएगी।

खाद्य वस्तुओं पर असर की आशंका

ढुलाई महंगी होने से दूध, चाय, कॉफी, फल, दाल, मसाले, अंडे, मांस और मछली जैसी वस्तुओं की कीमतों में तेजी आ सकती है। इससे आने वाले महीनों में खाद्य महंगाई बढ़ने की संभावना जताई गई है।

कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स, लकड़ी उत्पाद और निर्माण सामग्री जैसे सीमेंट व सिरेमिक्स पर भी असर पड़ सकता है। वहीं रसायन, कोयला और धातु उद्योगों में भी उत्पादन लागत बढ़ने की आशंका है, जिससे कंपनियां कीमतें बढ़ाने या छोटे पैकिंग का सहारा ले सकती हैं।

कर राहत से आंशिक संतुलन

सितंबर 2025 में किए गए जीएसटी दरों में कटौती से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन क्रिसिल के अनुसार यह ईंधन महंगाई के प्रभाव को पूरी तरह संतुलित नहीं कर पाएगी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि फिलहाल महंगाई आरबीआई के 4 प्रतिशत लक्ष्य से नीचे है, लेकिन इसमें धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो सकती है। केंद्रीय बैंक को वैश्विक तेल कीमतों, खाद्य महंगाई और मौसम संबंधी जोखिमों पर लगातार नजर रखनी होगी।

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