नई दिल्लीः केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर चल रही जांच के बीच मंगलवार को संसदीय स्थायी समिति के समक्ष कक्षा 12 के छात्र सार्थक सिद्धांत पेश हुए। समिति शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों से जुड़े पहलुओं की समीक्षा कर रही है।
संसद भवन परिसर स्थित एनेक्सी में हुई बैठक में सार्थक सिद्धांत ने OSM प्रणाली से जुड़े अपने निष्कर्ष प्रस्तुत किए और टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए।
उनके अनुसार, सीबीएसई द्वारा जारी अलग-अलग टेंडर दस्तावेजों में कई बदलाव किए गए हैं, जो चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्न खड़े करते हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ संशोधन विशेष सेवा प्रदाता के पक्ष में प्रतीत होते हैं और लगभग 15 प्रकार की विसंगतियां सामने आई हैं।
छात्र ने यह भी कहा कि पुराने टेंडर में खराब प्रदर्शन पर सेवा प्रदाता को अयोग्य घोषित करने का प्रावधान था, जिसे बाद में हटा दिया गया। इसके अलावा ब्लैकलिस्टिंग, वित्तीय पात्रता, सीएमएमआई स्तर और परियोजना मानदंडों से जुड़े नियमों में भी बदलाव किए जाने का आरोप लगाया गया।
हालांकि, सार्थक सिद्धांत ने स्पष्ट किया कि वे OSM प्रणाली के विरोधी नहीं हैं। उनका कहना था कि यह एक सकारात्मक तकनीकी बदलाव है, लेकिन इसे लागू करने से पहले व्यापक पायलट परीक्षण और मूल्यांकन जरूरी है।
संसदीय समिति इस समय न केवल OSM प्रणाली की समीक्षा कर रही है, बल्कि कक्षा 9 और 10 में लागू तीन-भाषा फॉर्मूले पर भी विचार कर रही है। उद्देश्य शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुधार सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।