🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

भारत-ओमान व्यापार समझौता लागू, भारतीय निर्यातकों को मिलेगा बड़ा लाभ- विशेषज्ञों ने जताई उम्मीद

1 जून से प्रभावी हुआ कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट, श्रम-प्रधान और निर्यात-उन्मुख।

कोलकाता : भारत और ओमान के बीच व्यापारिक संबंधों को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से किए गए मुक्त व्यापार समझौते, यानी कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (सीईपीए), को सोमवार से औपचारिक रूप से लागू कर दिया गया। इस समझौते के प्रभावी होने के साथ ही भारतीय निर्यातकों को ओमान के बाजार में विशेष शुल्क रियायतों का लाभ मिलेगा, जिससे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में उनकी स्थिति और मजबूत होने की संभावना है।

इस अवसर पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि समझौते के लागू होने से भारतीय निर्यातकों को ओमान में विशेष टैरिफ सुविधाएं प्राप्त होंगी। उनके अनुसार, इससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और निर्यात कारोबार को नई गति मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते का लाभ केवल राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि विभिन्न राज्यों के निर्यातकों को भी मिलेगा। पश्चिम बंगाल के निर्यात क्षेत्र के लिए भी यह समझौता महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी उत्पाद सूची में दार्जिलिंग चाय, कोलकाता के चमड़ा उत्पाद, हावड़ा के इंजीनियरिंग सामान, जूट उत्पाद, मालदा के आम, प्रसंस्कृत समुद्री खाद्य पदार्थ तथा हैंडलूम उत्पाद शामिल हैं।

इसका अर्थ है कि पश्चिम बंगाल से इन उत्पादों के निर्यात में वृद्धि की संभावना है। इससे संबंधित उद्योगों, निर्यातक संस्थानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े किसानों को भी प्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते निर्यात से उत्पादन गतिविधियां तेज होंगी और रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि हो सकती है।

उल्लेखनीय है कि भारत और ओमान के बीच इस व्यापार समझौते पर पिछले वर्ष दिसंबर में ओमान की राजधानी मस्कट में हस्ताक्षर किए गए थे। दोनों देशों ने अपने-अपने प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद इसे 1 जून से औपचारिक रूप से लागू कर दिया।

इस महत्वपूर्ण अवसर को चिह्नित करने के लिए मुंबई, कोलकाता और चेन्नई से कृषि उत्पादों, रत्न एवं आभूषणों सहित विभिन्न वस्तुओं की लगभग 10 खेप विशेष शुल्क रियायतों के साथ ओमान भेजी गईं। व्यापार जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि यह केवल एक प्रतीकात्मक कदम नहीं है, बल्कि भारत और ओमान के बीच आर्थिक सहयोग के नए दौर की शुरुआत का संकेत भी है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस समझौते का सबसे अधिक लाभ भारत के श्रम-प्रधान और निर्यात-उन्मुख उद्योगों को मिलने की संभावना है। शुल्क में राहत मिलने से भारतीय उत्पाद ओमान के बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे, जिससे निर्यात में वृद्धि और उद्योगों के विस्तार का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

व्यापार विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि सीईपीए के लागू होने से दोनों देशों के बीच निवेश, औद्योगिक सहयोग और आपूर्ति श्रृंखला को भी मजबूती मिलेगी। इससे दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी को नया आयाम मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

Articles you may like: