नई दिल्ली : ईरान युद्ध के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में उत्पन्न अस्थिरता का असर भारत पर भी दिखाई देने लगा है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव की वजह से वित्तीय दबाव झेल रहे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) तथा विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों को राहत देने के लिए देश के वाणिज्यिक बैंकों ने केंद्र सरकार की आपातकालीन ऋण सहायता योजना के तहत अब तक 35 हजार करोड़ रुपये से अधिक के ऋण को मंजूरी दी है।
वित्तीय सेवा विभाग के संयुक्त सचिव मनोज मुथाथिल अयप्पन ने सोमवार को बताया कि सरकार की ‘इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम’ (ईसीएलजीएस) 5.0 के अंतर्गत यह वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने जानकारी दी कि 29 मई तक लगभग 80 हजार ऋण आवेदनों को स्वीकृति दी जा चुकी है। इसके तहत कुल 35,194 करोड़ रुपये के ऋण मंजूर किए गए हैं। साथ ही 15,720 करोड़ रुपये की गारंटी भी प्रदान की गई है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस योजना को 5 मई को मंजूरी दी थी। सरकार का लक्ष्य इस योजना के माध्यम से अर्थव्यवस्था में कुल 2.55 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त ऋण प्रवाह को सुनिश्चित करना है। इस पैकेज में पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित विमानन क्षेत्र के लिए 5,000 करोड़ रुपये विशेष रूप से निर्धारित किए गए हैं।
मनोज मुथाथिल अयप्पन ने बताया कि योजना की पूरी प्रक्रिया डिजिटल होने के कारण आवेदन से लेकर ऋण स्वीकृति तक की प्रक्रिया मात्र पांच से सात दिनों के भीतर पूरी हो रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों को इस योजना का लाभ पहुंचाना चाहती है, इसलिए इसके नियमों को यथासंभव सरल बनाया गया है। हालांकि, 31 मार्च 2026 तक ‘एसएमए-2’ श्रेणी के ऋण खाताधारकों को इस योजना के दायरे से बाहर रखा गया है।
एमएसएमई और अन्य छोटे उद्योगों को योजना का लाभ दिलाने के लिए देशभर में जागरूकता और प्रचार अभियान भी चलाया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रभावित कारोबारियों और औद्योगिक इकाइयों को योजना की सुविधाओं के बारे में जानकारी देना है।
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी संघर्ष के कारण फरवरी से ही अनेक एमएसएमई इकाइयां और विमानन कंपनियां आर्थिक दबाव का सामना कर रही हैं। ईंधन की बढ़ती कीमतें, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अनिश्चितता ने उनके कारोबार को सीधे प्रभावित किया है।
ईसीएलजीएस 5.0 के तहत विमानन कंपनियां अपनी अधिकतम ऋण सीमा के 100 प्रतिशत तक, यानी अधिकतम 1,500 करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त ऋण प्राप्त कर सकेंगी। वहीं अन्य उद्योग और संस्थान अपनी मौजूदा कार्यशील पूंजी का 20 प्रतिशत तक अतिरिक्त ऋण ले सकेंगे, जिसकी अधिकतम सीमा 100 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। इसके अतिरिक्त बैंकों को संबंधित संस्थानों की कार्यशील पूंजी के आधार पर 20 प्रतिशत तक अतिरिक्त ऋण उपलब्ध कराने की अनुमति भी दी गई है।
इस योजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता ऋण गारंटी सुरक्षा है। अतिरिक्त ऋण सुविधा के तहत एमएसएमई के लिए 100 प्रतिशत तथा अन्य संस्थानों के लिए 90 प्रतिशत तक की गारंटी कवरेज नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (एनसीजीटीसी) द्वारा प्रदान की जाएगी। इससे बैंकों का जोखिम कम होगा और ऋण वितरण की प्रक्रिया अधिक सुगम बन सकेगी।
ऋण की अवधि को लेकर भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। विमानन कंपनियों के लिए पहली ऋण किश्त जारी होने की तिथि से सात वर्ष की अवधि निर्धारित की गई है, जिसमें शुरुआती दो वर्ष मोरेटोरियम अवधि के रूप में शामिल होंगे।
दूसरी ओर, एमएसएमई और अन्य औद्योगिक इकाइयों के लिए ऋण अवधि पांच वर्ष रखी गई है, जिसमें पहले एक वर्ष तक मोरेटोरियम की सुविधा उपलब्ध रहेगी। केंद्र सरकार का मानना है कि यह योजना वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया संकट के बीच भारतीय उद्योगों को वित्तीय स्थिरता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी तथा उत्पादन, रोजगार और निवेश गतिविधियों को बनाए रखने में सहायक साबित होगी।