कोलकाताः कोलकाता में पश्चिम बंगाल की नई भाजपा सरकार ने अपने मंत्रिमंडल का बड़ा विस्तार करते हुए “शुभेंदु अधिकारी की नई कैबिनेट” को और मजबूत किया है। लोक भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल आर.एन. रवि ने 35 नए मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके साथ ही कैबिनेट की कुल संख्या बढ़कर 41 हो गई है।
यह विस्तार सरकार गठन के लगभग तीन सप्ताह बाद किया गया है। भाजपा ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 208 सीटों के साथ बहुमत हासिल कर 15 साल पुरानी तृणमूल कांग्रेस सरकार को सत्ता से बाहर किया था। नई कैबिनेट में अनुभवी नेताओं के साथ युवाओं और विभिन्न पेशेवर पृष्ठभूमियों के प्रतिनिधियों को संतुलित रूप से शामिल किया गया है।
शिक्षा और पेशेवर योग्यता को प्राथमिकता
शुभेंदु अधिकारी की नई कैबिनेट में शिक्षा और योग्यता को खास महत्व दिया गया है। अधिकांश मंत्री स्नातक या उससे अधिक शिक्षित हैं, जबकि कई के पास स्नातकोत्तर डिग्री है। तीन मंत्रियों के पास डॉक्टरेट (पीएचडी) की उपाधि भी है।
इस टीम में डॉक्टर, शिक्षाविद और पत्रकार जैसे पेशेवर क्षेत्रों से जुड़े लोग शामिल किए गए हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े डॉक्टर मंत्रियों को स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ शिक्षा नीति को मजबूत बनाने में भूमिका निभाएंगे।
पत्रकारिता और बौद्धिक क्षेत्र से जुड़े चेहरों को भी कैबिनेट में जगह मिली है, जिससे नीति निर्माण में व्यावहारिक अनुभव और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण जुड़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
युवा और सामाजिक संतुलन पर विशेष फोकस
नई कैबिनेट में युवाओं को भी अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं। कई ऐसे मंत्री शामिल हैं जो अपेक्षाकृत युवा हैं और पहली बार बड़े प्रशासनिक दायित्व निभा रहे हैं। वहीं अनुभवी नेताओं को भी महत्वपूर्ण विभाग दिए गए हैं, ताकि शासन में संतुलन बना रहे।
कैबिनेट में 13 अलग-अलग जातीय समूहों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है। इसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों—उत्तर बंगाल, कोलकाता को भी संतुलित प्रतिनिधित्व दिया गया है।
अनुभव और पेशेवरों का मिश्रण, भविष्य की उम्मीदें
शुभेंदु अधिकारी की नई कैबिनेट में अनुभवी नेताओं के साथ पूर्व सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री और लंबे समय से राजनीति में सक्रिय विधायक शामिल हैं।
वरिष्ठ चेहरों में दिलीप घोष, निशिथ प्रामाणिक, तापस रॉय और अर्जुन सिंह जैसे नेता शामिल हैं, जिनके पास संगठन और प्रशासन दोनों का अनुभव है। वहीं अग्निमित्रा पॉल जैसी महिला नेतृत्व को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह कैबिनेट अनुभव, युवा ऊर्जा और पेशेवर दक्षता का संतुलित मिश्रण है। डॉक्टरों, पत्रकारों और शिक्षित वर्ग की भागीदारी से उम्मीद है कि सरकार नीति निर्माण और प्रशासनिक कार्यों में अधिक प्रभावी साबित होगी।