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टीएमसी में अंदरूनी कलह पर ममता का पलटवार, बोलीं- पार्टी तोड़ना आसान नहीं

टीएमसी में बढ़ते असंतोष के बीच ममता बनर्जी का शक्ति प्रदर्शन, बागी नेताओं और भाजपा पर साधा निशाना

By श्वेता सिंह

Jun 01, 2026 22:41 IST

कोलकाताः पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली बड़ी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ती नाराजगी और राजनीतिक उठापटक के बीच पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने आक्रामक तेवर दिखाए हैं। कोलकाता के कालीघाट स्थित अपने आवास से जारी वीडियो संदेश में उन्होंने पार्टी के भीतर असंतोष पैदा करने वाले नेताओं और भाजपा पर एक साथ हमला बोला। बिना किसी का नाम लिए उन्होंने कहा कि कुछ लोग संगठन को कमजोर करने और तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि तृणमूल कांग्रेस को खत्म करना इतना आसान नहीं है।

ममता बनर्जी का यह बयान ऐसे समय आया है जब पार्टी के दो विधायक-ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा-पहले ही संगठन से बाहर किए जा चुके हैं। दोनों पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगाए गए हैं। राजनीतिक गलियारों में इन घटनाओं को टीएमसी के भीतर बढ़ती खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है।

भाजपा से संपर्क रखने वालों पर भी साधा निशाना

चुनाव परिणामों के बाद कई पार्षदों के इस्तीफे और कुछ विधायकों की पार्टी बैठकों से दूरी ने टीएमसी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। सूत्रों के अनुसार कई नेता भाजपा के संपर्क में होने की चर्चा में हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि जो लोग पहले ही दूसरी पार्टी में जाने का मन बना चुके हैं, वे अब तरह-तरह के बहाने खोज रहे हैं।

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उन्होंने कहा कि पार्टी हमेशा कार्यकर्ताओं और जनता के साथ खड़ी रही है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अभिषेक बनर्जी लगातार संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी कारणों से इन दिनों सार्वजनिक कार्यक्रमों में कम दिखाई दे रहे हैं। ममता ने दावा किया कि विपक्षी दल के इशारे पर कुछ लोग पार्टी छोड़ रहे हैं, लेकिन इससे संगठन की जड़ों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

अभिषेक पर हमले और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठाए सवाल

अपने संबोधन में ममता बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि उस घटना में स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी। इसके साथ ही उन्होंने विपक्षी नेताओं के कुछ बयानों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेदों की भी एक मर्यादा होती है।

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उन्होंने 2026 विधानसभा चुनाव को लेकर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि कई सीटों पर चुनावी प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं रही। ममता ने दावा किया कि उनकी पार्टी को राजनीतिक रूप से नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई और चुनावी नतीजों को लेकर जनता के बीच अब भी कई सवाल मौजूद हैं। उनका कहना था कि तृणमूल कांग्रेस की हार केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि कई अन्य कारणों का परिणाम रही है।

कानून-व्यवस्था और हिंसा के मुद्दे पर सरकार को घेरा

टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने चुनाव के बाद हुई हिंसा, कथित हॉकर हटाओ अभियान और पार्टी नेताओं पर हमलों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर उनके कार्यकर्ताओं और समर्थकों को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।

ममता ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि राज्य के विभिन्न हिस्सों से लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही हैं, जिनमें टीएमसी समर्थकों को परेशान किए जाने की बात कही गई है।

धरने की तैयारी, दिल्ली तक आंदोलन की चेतावनी

ममता बनर्जी ने स्पष्ट कर दिया कि उनकी पार्टी राजनीतिक और जनसरोकार के मुद्दों पर संघर्ष जारी रखेगी। उन्होंने बताया कि रानी रासमणि एवेन्यू में प्रस्तावित धरना कार्यक्रम के लिए प्रशासन से अनुमति मांगी गई थी, लेकिन अनुमति नहीं दी गई। इसके बावजूद उन्होंने कार्यकर्ताओं से कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की।

उन्होंने कहा कि यदि किसी स्थान पर धरना देने से रोका गया तो वहीं शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराया जाएगा। साथ ही चेतावनी दी कि यदि बंगाल में लोकतांत्रिक आंदोलन की अनुमति नहीं मिली, तो पार्टी दिल्ली में भी बड़े स्तर पर प्रदर्शन करने पर विचार करेगी।

ममता बनर्जी ने विश्वास जताया कि मौजूदा राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद टीएमसी कमजोर नहीं होगी। उन्होंने कहा कि पार्टी पहले भी कठिन दौर से निकली है और इस बार भी अधिक मजबूती के साथ जनता के बीच लौटेगी।

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