कोलकाताः पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा में विपक्ष के नेता के चयन से जुड़े हस्ताक्षर विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी सोमवार को निर्धारित समय पर CID मुख्यालय भवानी भवन नहीं पहुंचे। उन्होंने अपनी अनुपस्थिति के लिए स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला देते हुए अतिरिक्त समय की मांग की। इसके बाद जांच एजेंसी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उनके कोलकाता के कालीघाट स्थित आवास पर दूसरा नोटिस भेजा है।
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सोमवार शाम CID अधिकारियों की एक टीम कालीघाट रोड स्थित आवास पर पहुंची। काफी देर इंतजार के बाद अयन नामक एक कर्मचारी बाहर आया, जिसे अधिकारियों ने नोटिस सौंपा। नोटिस में अभिषेक बनर्जी को सात दिनों के भीतर जांच में शामिल होने का निर्देश दिया गया है। इस दौरान अधिकारियों ने सुरक्षा कर्मियों से बातचीत की और पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी कराई।
विपक्ष के नेता के चयन से शुरू हुआ विवाद
पूरा मामला विधानसभा में विपक्ष के नेता के चयन से जुड़ा हुआ है। 9 मई को टीएमसी ने विधानसभा अध्यक्ष रथींद्रनाथ बोस को पत्र भेजकर शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता नियुक्त किए जाने की जानकारी दी थी। इसके बाद 18 मई को विधानसभा के प्रिंसिपल सेक्रेटरी ने इस संबंध में मूल प्रस्ताव की मांग की।
20 मई को विधानसभा सचिवालय को एक प्रस्ताव भेजा गया, जिस पर अभिषेक बनर्जी समेत 70 टीएमसी विधायकों के हस्ताक्षर बताए गए। लेकिन कुछ दिनों बाद इस दस्तावेज को लेकर विवाद खड़ा हो गया। 27 मई को टीएमसी विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने दावा किया कि प्रस्ताव में उनके हस्ताक्षर जाली तरीके से लगाए गए हैं और उन्होंने इसकी शिकायत विधानसभा अध्यक्ष से की।
शिकायत के बाद FIR, अब SIT कर रही जांच
दोनों विधायकों की शिकायत के आधार पर हेयर स्ट्रीट थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए गृह विभाग के निर्देश पर जांच CID को सौंप दी गई। एजेंसी ने पूरे प्रकरण की तह तक पहुंचने के लिए पांच सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।
जांच अधिकारियों का मानना है कि दस्तावेजों की सत्यता और हस्ताक्षरों की जांच इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी सिलसिले में अभिषेक बनर्जी को पूछताछ के लिए बुलाया गया था।
पार्टी की कार्रवाई और बढ़ी राजनीतिक गर्माहट
हस्ताक्षर फर्जीवाड़े का आरोप लगाने वाले दोनों विधायकों के खिलाफ टीएमसी ने सख्त कदम उठाते हुए उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया है। 2026 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की बड़ी जीत के बाद टीएमसी पहले ही कमजोर स्थिति में है और वर्तमान में उसके पास 78 विधायक हैं। ऐसे में यह विवाद पार्टी के भीतर असंतोष और मतभेद की चर्चाओं को भी हवा दे रहा है।
सरकार और अभिषेक के अलग-अलग दावे
नबान्न में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यह जांच सरकार की ओर से नहीं बल्कि टीएमसी के अपने विधायकों की शिकायत के आधार पर शुरू हुई है। उन्होंने कहा कि कानून अपना काम करेगा और यदि किसी ने हस्ताक्षरों में हेराफेरी की है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
दूसरी ओर, अभिषेक बनर्जी इस पूरे मामले को राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित बता रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है, हालांकि वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या वे अगले सात दिनों के भीतर CID के सामने पेश होते हैं या फिर जांच एजेंसी आगे कोई नया कदम उठाती है।