नई दिल्लीः देश में वस्तु एवं सेवा कर (GST) से होने वाली आय मजबूत बनी हुई है, लेकिन कर ढांचे में व्यापक सुधार की जरूरत पर विशेषज्ञों ने जोर दिया है। कर विशेषज्ञों का कहना है कि रिफंड प्रक्रिया को आसान बनाने, इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को दुरुस्त करने और पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाने जैसे कदमों से कारोबारी माहौल और बेहतर हो सकता है।
यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब मई 2026 में जीएसटी संग्रह मजबूत प्रदर्शन के साथ 1.94 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया है और अर्थव्यवस्था में स्थिरता के संकेत मिल रहे हैं।
रिफंड नियमों में राहत की मांग
प्राइस वॉटरहाउस एंड कंपनी एलएलपी के पार्टनर प्रतीक जैन ने कहा कि सप्लाई चेन से जुड़ी लागत बढ़ने के कारण उद्योगों पर कार्यशील पूंजी का दबाव बढ़ा है। ऐसे में सरकार को इनपुट जीएसटी रिफंड नियमों को आसान बनाकर उद्योगों को राहत देने पर विचार करना चाहिए, ताकि कई व्यवसायों में अटका हुआ रिफंड समय पर मिल सके।
संरचनात्मक सुधारों पर जोर
टैक्स कनेक्ट एडवाइजरी सर्विसेज एलएलपी के पार्टनर विवेक जालान ने कहा कि आगामी जीएसटी परिषद बैठक में इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर की समस्या को गंभीरता से संबोधित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इनपुट सेवाओं पर रिफंड की जटिलताओं के कारण प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो रही है।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाना एक बड़ा सुधार साबित हो सकता है, जिससे कर प्रणाली में दोहराव खत्म होगा और कर भार अधिक संतुलित होगा। साथ ही उन्होंने रिफंड प्रक्रिया को पारदर्शी और सरल बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
जीएसटी व्यवस्था में बढ़ती स्थिरता
ग्रांट थॉर्नटन भारत के टैक्स कॉन्ट्रोवर्सी मैनेजमेंट लीडर एवं पार्टनर मनोज मिश्रा ने कहा कि इस वर्ष किसी बड़े असाधारण राजस्व समर्थन के बिना भी जीएसटी संग्रह लगातार 2 लाख करोड़ रुपये के करीब बना हुआ है। यह इस प्रणाली की परिपक्वता और स्थिरता को दर्शाता है।
मजबूत राजस्व के बीच सुधार की जरूरत
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में सकल जीएसटी संग्रह सालाना आधार पर 3.2 प्रतिशत बढ़कर लगभग 1,94,184 करोड़ रुपये रहा। वहीं चालू वित्त वर्ष में अब तक का कुल संग्रह 4,36,887 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो 6.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा आंकड़े अर्थव्यवस्था की मजबूती दिखाते हैं, लेकिन यदि रिफंड व्यवस्था, कर संरचना और अनुपालन प्रक्रिया में सुधार किए जाएं तो आने वाले वर्षों में जीएसटी प्रणाली और अधिक प्रभावी व संतुलित हो सकती है।