नई दिल्लीः केंद्र सरकार ने देश के वस्त्र और परिधान उद्योग को राहत देने के लिए कपास आयात पर लगने वाले सीमा शुल्क को अस्थायी रूप से समाप्त करने का फैसला किया है। सरकार का मानना है कि इससे कपास की उपलब्धता बढ़ेगी, उत्पादन लागत कम होगी और उद्योग को बेहतर गति मिल सकेगी।
वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, 1 जून 2026 से 31 अक्टूबर 2026 तक आयातित कपास पर कोई मूल सीमा शुल्क (बेसिक कस्टम ड्यूटी) नहीं लगेगा। इसके साथ ही कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर (एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस) से भी पूरी छूट दी गई है। यानी इस अवधि में कपास का आयात पहले की तुलना में सस्ता होगा।
कपास की उपलब्धता बढ़ाने पर सरकार का फोकस
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य भारतीय टेक्सटाइल सेक्टर के लिए पर्याप्त मात्रा में कपास उपलब्ध कराना है। वस्त्र उद्योग लंबे समय से मांग कर रहा था कि जब घरेलू बाजार में कपास की आपूर्ति कम हो और कीमतें बढ़ रही हों, तब आयात को सस्ता बनाया जाए ताकि उत्पादन प्रभावित न हो।
सरकार का मानना है कि शुल्क में छूट मिलने से कपास की आपूर्ति बढ़ेगी और उद्योग को कच्चे माल की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। इससे उत्पादन चक्र सुचारु रूप से चलता रहेगा।
उत्पादन लागत घटेगी, उपभोक्ताओं को भी फायदा संभव
वित्त मंत्रालय के अनुसार, कपास वस्त्र उद्योग की सबसे महत्वपूर्ण कच्ची सामग्री है। आयात लागत कम होने से धागा, कपड़ा और परिधान बनाने वाली इकाइयों की लागत में कमी आ सकती है।
इसका लाभ केवल उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा। यदि उत्पादन लागत कम होती है तो इसका असर बाजार कीमतों पर भी पड़ सकता है, जिससे उपभोक्ताओं को भी राहत मिलने की संभावना है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि लागत में कमी आने से भारतीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकते हैं।
छोटे और मध्यम उद्योगों को सबसे ज्यादा फायदा
सरकार का कहना है कि इस फैसले का सबसे अधिक लाभ छोटे और मध्यम उद्यमों (SME) को मिलेगा। ये इकाइयां कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं।
कपास की बेहतर उपलब्धता और कम लागत से इन उद्योगों को उत्पादन बढ़ाने, ऑर्डर समय पर पूरा करने और बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी। इससे रोजगार और औद्योगिक गतिविधियों को भी समर्थन मिल सकता है।
कानूनी प्रावधानों के तहत जारी हुई अधिसूचना
राजस्व विभाग ने यह अधिसूचना सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 और वित्त अधिनियम, 2021 के तहत प्राप्त अधिकारों का उपयोग करते हुए जारी की है। सरकार ने इसे जनहित में लिया गया निर्णय बताया है।
अधिसूचना में कहा गया है कि देश के वस्त्र क्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह छूट सीमित अवधि के लिए दी जा रही है, ताकि उद्योग को आवश्यक कच्चा माल आसानी से उपलब्ध हो सके।
भारतीय टेक्सटाइल उद्योग के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
भारत का वस्त्र और परिधान क्षेत्र देश के सबसे बड़े विनिर्माण क्षेत्रों में से एक है। यह करोड़ों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार देता है तथा निर्यात में भी महत्वपूर्ण योगदान करता है।
कपास इस उद्योग की रीढ़ मानी जाती है। ऐसे में जब घरेलू आपूर्ति पर दबाव बढ़ता है या कीमतों में तेजी आती है, तब आयात शुल्क कम या समाप्त करने जैसे कदम उद्योग को स्थिरता प्रदान करते हैं। सरकार को उम्मीद है कि यह फैसला उत्पादन, निर्यात और निवेश-तीनों को बढ़ावा देगा।