मुंबई : इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2026 में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने एक नया और सख्त सुरक्षा कदम उठाया है। मैचों की निष्पक्षता, सुरक्षा और भ्रष्टाचार-रोधी उपायों को मजबूत करने के उद्देश्य से बोर्ड की एंटी-करप्शन एंड सिक्योरिटी यूनिट (एसीएसयू) ने स्मार्ट ग्लास, स्मार्ट सनग्लास और वीडियो रिकॉर्डिंग या संचार सुविधा वाले पहनने योग्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उपयोग पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं।
यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है, जब विराट कोहली द्वारा प्रचारित एआई आधारित स्मार्ट ग्लास देशभर में चर्चा का विषय बने हुए हैं। तकनीक के प्रचार के बीच अब इन उपकरणों को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी बढ़ गई हैं।
हाल ही में ओकली नामक कंपनी ने भारतीय बाजार में अपना नया ‘ओकली मेटा परफॉर्मेंस एआई ग्लास’ पेश किया था। इस उत्पाद के प्रचार अभियान का प्रमुख चेहरा भारतीय क्रिकेट स्टार विराट कोहली थे। विज्ञापनों में उन्हें अभ्यास सत्र, जिम प्रशिक्षण और मैच की तैयारियों के दौरान इस स्मार्ट ग्लास का इस्तेमाल करते हुए दिखाया गया था।
कंपनी के अनुसार यह प्रचार अभियान सोशल मीडिया पर बेहद लोकप्रिय रहा। संबंधित वीडियो को एक अरब से अधिक बार देखा गया, जबकि उसे 5.3 मिलियन से अधिक लाइक मिले। आईपीएल के दौरान भी कई मौकों पर विराट कोहली को अभ्यास के समय इस डिवाइस का उपयोग करते देखा गया था।
तकनीकी दृष्टि से इस तरह के स्मार्ट ग्लास कई आधुनिक सुविधाओं से लैस होते हैं। इनके जरिए उपयोगकर्ता वीडियो रिकॉर्ड कर सकते हैं, लाइव स्ट्रीमिंग कर सकते हैं, कॉल रिसीव कर सकते हैं, संदेश भेज सकते हैं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित विश्लेषण भी प्राप्त कर सकते हैं। खिलाड़ियों के प्रशिक्षण संबंधी आंकड़ों को रिकॉर्ड करने, प्रदर्शन का विश्लेषण करने और अनुभव साझा करने के लिए भी इन उपकरणों को उपयोगी माना जाता है।
हालांकि एसीएसयू का मानना है कि मैचों के दौरान नियंत्रित या प्रतिबंधित क्षेत्रों में ऐसे उपकरणों का उपयोग सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। इन डिवाइसों के माध्यम से गुप्त रूप से वीडियो रिकॉर्डिंग, लाइव प्रसारण या अनधिकृत संचार संभव है। इससे संवेदनशील जानकारी लीक होने या अवैध संपर्क स्थापित होने का जोखिम बढ़ जाता है।
बीसीसीआई सूत्रों के अनुसार, सभी आईपीएल फ्रेंचाइजी को पहले ही निर्देश भेज दिए गए हैं कि मैच के दिन प्रतिबंधित क्षेत्रों में कोई भी खिलाड़ी या सपोर्ट स्टाफ स्मार्ट ग्लास, स्मार्ट सनग्लास या संचार-सक्षम गॉगल्स का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा।
एसीएसयू का मानना है कि हाल के दिनों में कई तकनीकी कंपनियों ने आईपीएल से जुड़े खिलाड़ियों और अधिकारियों के बीच ऐसे उत्पादों का प्रचार बढ़ाया है, जिससे स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है।
नई व्यवस्था के तहत मैच के दिन खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ को प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश करने से पहले अपने सभी संचार-सक्षम उपकरण सुरक्षा अधिकारियों के पास जमा कराने होंगे। इनमें स्मार्ट ग्लास, मोबाइल फोन, स्मार्टवॉच और इसी तरह के अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण शामिल हैं।
एसीएसयू ने इन उपकरणों को प्लेयर्स एंड मैच ऑफिशियल्स एरिया (पीएमओए) नियमावली के तहत ‘कम्युनिकेशन डिवाइसेज’ और ‘ऑडियो/वीडियो रिकॉर्डिंग डिवाइसेज’ की श्रेणी में रखा है।
इस सख्त फैसले के पीछे मौजूदा सीजन की एक विवादास्पद घटना भी बताई जा रही है। राजस्थान रॉयल्स के टीम मैनेजर रोमी भिंदर पर मैच के दौरान डगआउट में मोबाइल फोन इस्तेमाल करने के कारण एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। इस घटना के बाद बोर्ड ने महसूस किया कि सुरक्षा नियमों को और अधिक कड़ा करने की आवश्यकता है।
बीसीसीआई ने स्पष्ट कर दिया है कि पीएमओए नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
एसीएसयू का मानना है कि जैसे-जैसे पहनने योग्य तकनीक (वेयरेबल टेक्नोलॉजी) अधिक उन्नत होती जा रही है, वैसे-वैसे गुप्त संचार और जानकारी के दुरुपयोग की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं। यही कारण है कि दुनिया की सबसे लोकप्रिय और व्यावसायिक रूप से सबसे सफल टी20 लीगों में से एक आईपीएल की निष्पक्षता, पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समय रहते यह कदम उठाया गया है।