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ब्रिटेन छोड़ने वालों में भारतीय सबसे आगे, रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा सामने आया,

भारतीयों के बाद सबसे अधिक संख्या में चीनी नागरिकों ने भी यूके छोड़ा

लंदन : ब्रिटेन की सख्त होती आव्रजन नीतियों का असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार, देश में ‘नेट माइग्रेशन’ यानी आने और जाने वाले प्रवासियों के बीच का अंतर उल्लेखनीय रूप से घटा है। विदेशी नागरिकों में सबसे बड़ी संख्या भारतीयों की रही है, जिन्होंने पिछले वर्ष ब्रिटेन छोड़कर अन्य देशों का रुख किया।

ब्रिटेन के ऑफिस फॉर नेशनल स्टैटिस्टिक्स (ओएनएस) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 के दौरान लगभग 51 हजार भारतीय छात्र ब्रिटेन से बाहर चले गए। इसके अलावा रोजगार के लिए वहां गए करीब 21 हजार भारतीयों ने भी देश छोड़ा। अन्य श्रेणियों में शामिल लगभग तीन हजार भारतीय नागरिक भी पिछले वर्ष ब्रिटेन से अन्य देशों में स्थानांतरित हो गए।

रिपोर्ट से यह भी संकेत मिलता है कि पिछले कुछ वर्षों की तुलना में ब्रिटेन में रह रहे भारतीयों की संख्या लगभग आधी रह गई है। भारतीयों के बाद सबसे अधिक संख्या चीन के नागरिकों की रही, जिन्होंने ब्रिटेन छोड़ा। आंकड़ों के अनुसार, लगभग 46 हजार चीनी छात्र और पेशेवर कर्मचारी ब्रिटेन से बाहर चले गए। इसके अलावा यूक्रेन, पाकिस्तान और नाइजीरिया के नागरिकों की भी बड़ी संख्या ने ब्रिटेन छोड़ा।

आंकड़े बताते हैं कि पिछले वर्ष विभिन्न देशों से पढ़ाई या रोजगार के उद्देश्य से ब्रिटेन पहुंचने वाले विदेशी नागरिकों की संख्या केवल 1 लाख 71 हजार रही। इसके विपरीत, पूर्व कंजर्वेटिव सरकार के कार्यकाल में यह संख्या 9 लाख 44 हजार तक पहुंच गई थी।

इस विषय पर ब्रिटेन की गृह सचिव शबाना महमूद ने कहा कि सरकार आव्रजन व्यवस्था पर नियंत्रण फिर से स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा, “जो लोग इस देश में आकर योगदान देना चाहते हैं और अपने लिए बेहतर जीवन बनाना चाहते हैं, उनका हम हमेशा स्वागत करेंगे। लेकिन हमारी सीमाओं पर व्यवस्था और नियंत्रण बनाए रखना भी आवश्यक है। इसी उद्देश्य से मैं कौशल-आधारित आव्रजन नीति को आगे बढ़ाना चाहती हूं।

हालांकि इस पूरी तस्वीर का एक दूसरा पहलू भी है। जहां एक ओर बड़ी संख्या में भारतीय ब्रिटेन छोड़ रहे है वहीं दूसरी ओर भारतीय नागरिकों के वीजा विस्तार के मामलों में भी सबसे आगे हैं।

विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र से जुड़े भारतीय पेशेवरों के वीजा की अवधि सबसे अधिक बढ़ाई गई है। इस वर्ष मार्च तक एक लाख से अधिक भारतीय नागरिकों के वीजा का नवीनीकरण या विस्तार किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, ‘स्किल्ड वर्कर’ श्रेणी के तहत लगभग 90 हजार भारतीयों को वीजा विस्तार मिला है। वहीं ‘ग्रेजुएट रूट’ वीजा के अंतर्गत 70 हजार 371 भारतीयों को विस्तार प्रदान किया गया।

इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय नागरिक एक ओर बड़ी संख्या में ब्रिटेन छोड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य सेवा, कुशल रोजगार और उच्च शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उनकी उपस्थिति और भूमिका अभी भी मजबूत बनी हुई है। इसी कारण वीजा विस्तार के मामलों में भी भारतीय नागरिक सबसे प्रमुख समूहों में शामिल हैं।

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