नई दिल्लीः प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रियल एस्टेट कारोबारी विक्रम वाधवा को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) के तहत 29 May को की गई। मामला आईडीएफसी बैंक (IDFC Bank) से जुड़े कथित बैंक फ्रॉड और करीब ₹645 करोड़ की सार्वजनिक धनराशि के गबन से संबंधित बताया जा रहा है।
जांच एजेंसी के अनुसार यह पूरा मामला हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन और चंडीगढ़ व पंचकूला स्थित दो निजी स्कूलों के बैंक खातों से जुड़ा है, जिनमें IDFC First Bank के जरिए लेन-देन हुआ था। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोप है कि इन खातों से सरकारी और संस्थागत धन को सुनियोजित तरीके से निकाला गया और उसका गलत इस्तेमाल किया गया।
ED का कहना है कि इस पूरे घोटाले में विक्रम वाधवा प्रमुख आरोपियों में शामिल हैं। उनके साथ रिभव ऋषि, अभय कुमार, कुछ बैंक अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। एजेंसी के मुताबिक वाधवा ने अपराध से अर्जित धन (Proceeds of Crime) को छिपाने, उसे अलग-अलग चैनलों के जरिए घुमाने और वैध दिखाने में अहम भूमिका निभाई।
जांच में यह भी सामने आया है कि उनके व्यक्तिगत खातों में ₹70 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध राशि ट्रांसफर की गई, इसके अलावा बड़ी मात्रा में नकद लेन-देन भी हुआ। ED का आरोप है कि इस पैसे का इस्तेमाल कई कंपनियों में निवेश और संपत्तियां खरीदने में किया गया।
एजेंसी ने बताया कि कैप्को फिनटेक सर्विसेज, स्वस्तिक देश प्रोजेक्ट्स, आरएस ट्रेडर्स और एसआरआर प्लानिंग गुरु प्रा. लिमिटेड जैसी कई शेल कंपनियों के जरिए सरकारी फंड को अलग-अलग खातों में घुमाया गया। इसके बाद यह पैसा विभिन्न बैंकिंग चैनलों से होते हुए ज्वेलर्स तक पहुंचा, जहां बैंकिंग ट्रांजैक्शन के बदले नकद उपलब्ध कराया गया। बाद में इस नकदी को कथित रूप से सरकारी अधिकारियों और अन्य लोगों तक पहुंचाया गया।
ED ने यह भी स्पष्ट किया है कि पूरे पैसे के नेटवर्क और लाभार्थियों की पहचान के लिए जांच अभी जारी है। कई अन्य संपत्तियों और लेन-देन की भी जांच की जा रही है।
गिरफ्तारी के बाद विक्रम वाधवा को विशेष PMLA कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 2 जून तक चार दिन की ED हिरासत में भेज दिया गया है। इससे पहले इस मामले में रिभव ऋषि और अभय कुमार को 11 मई को गिरफ्तार किया गया था और 11 दिन की ED रिमांड के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है।