नई दिल्लीः वैश्विक स्तर पर बदलते कार्य परिवेश के बीच भारत में हाइब्रिड कार्य प्रणाली आने वाले वर्षों में प्रमुख मॉडल के रूप में स्थापित होती दिखाई दे रही है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अगले एक-दो वर्षों में ध्यान केवल कर्मचारियों को कार्यालय बुलाने पर नहीं, बल्कि कार्यालय में बिताए जाने वाले समय को अधिक उपयोगी और उद्देश्यपूर्ण बनाने पर रहेगा। जैसे-जैसे कंपनियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार कर रही हैं और टीमें विभिन्न शहरों तथा समय क्षेत्रों में काम कर रही हैं, कार्य संस्कृति भी उसी अनुरूप बदल रही है।
हाइब्रिड मॉडल को मिल रही सबसे अधिक पसंद
वैश्विक लेखा एवं वित्तीय पेशेवर संस्था एसीसीए की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार पूरी तरह घर से काम करने या पूरी तरह कार्यालय आधारित मॉडल की तुलना में हाइब्रिड कार्य व्यवस्था सबसे अधिक पसंद की जा रही है। रिपोर्ट बताती है कि दुनिया भर में 75 प्रतिशत और भारत में 79 प्रतिशत प्रतिभागी हाइब्रिड कार्य प्रणाली को प्राथमिकता देते हैं। भारत में इस मॉडल को अपनाने की रफ्तार भी बढ़ी है। वर्तमान में 53 प्रतिशत भारतीय कर्मचारी हाइब्रिड व्यवस्था के तहत काम कर रहे हैं, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 45 प्रतिशत था। यह वैश्विक औसत 45 प्रतिशत से भी अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार यह वृद्धि दर्शाती है कि संस्थाएं कर्मचारियों की पसंद और बदलती कार्यशैली के अनुरूप खुद को ढाल रही हैं।
कार्यालय में उपस्थिति को माना जा रहा करियर के लिए महत्वपूर्ण
रिपोर्ट में कार्यालय में नियोजित और उद्देश्यपूर्ण उपस्थिति के प्रति भी मजबूत समर्थन देखने को मिला। भारत में 74 प्रतिशत लोगों का मानना है कि संस्थाओं को कर्मचारियों के लिए प्रति सप्ताह कार्यालय में उपस्थिति के कुछ निश्चित दिन निर्धारित करने चाहिए। वहीं 69 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि कार्यालय में अधिक उपस्थिति करियर विकास में सहायक होती है। वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा 58 प्रतिशत है। युवा पीढ़ी भी इस सोच से सहमत दिखाई देती है। भारत में जेन-ज़ेड वर्ग के 72 प्रतिशत प्रतिभागियों ने माना कि कार्यालय में अधिक समय बिताने से करियर को लाभ मिलता है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा 63 प्रतिशत है।
एक जैसा नियम सभी पर लागू नहीं किया जा सकता
विशेषज्ञों का मानना है कि हाइब्रिड कार्य मॉडल कर्मचारियों और संस्थानों दोनों के लिए संतुलित और प्रभावी व्यवस्था है। इसके लिए एक समान नियम लागू करने के बजाय ऐसी लचीली और उद्देश्यपूर्ण नीतियां बनाई जानी चाहिए, जो तकनीकी सुविधाओं, ग्राहकों की जरूरतों और कर्मचारियों की व्यक्तिगत परिस्थितियों के अनुरूप हों। इससे उत्पादकता, सहयोग और कार्य-जीवन संतुलन बेहतर बनाए रखा जा सकता है।
आने वाले वर्षों में बढ़ सकती है कार्यालय उपस्थिति
रिपोर्ट के निष्कर्ष संकेत देते हैं कि कार्यस्थलों में लचीलापन बना रहेगा लेकिन कार्यालय में बिताए जाने वाले दिनों की भूमिका अधिक रणनीतिक हो जाएगी। भारत में 55 प्रतिशत प्रतिभागियों का मानना है कि अगले एक-दो वर्षों में उन्हें पहले की तुलना में अधिक बार कार्यालय जाना पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार वे संस्थाएं बेहतर प्रदर्शन करेंगी जो कार्यालय में बिताए जाने वाले समय को सार्थक, सहयोगात्मक और उत्पादक बनाने पर ध्यान देंगी। ऐसी कंपनियां न केवल प्रतिभाशाली कर्मचारियों को लंबे समय तक अपने साथ बनाए रखने में सफल होंगी, बल्कि कर्मचारियों के करियर विकास को भी गति दे सकेंगी।