नई दिल्लीःकेंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार को गुजरात के भुज में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे गुजरात के सीमावर्ती और तटीय जिलों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। बैठक में गुजरात के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी तथा कच्छ, वाव-थराद और पाटन के जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक मौजूद रहे।
बैठक में सीमा प्रबंधन को और प्रभावी बनाने, उभरती सुरक्षा चुनौतियों तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में संभावित खतरों पर चर्चा की गई। शाह ने कहा कि सीमा पर बाड़बंदी, समुद्री सुरक्षा और राज्य सरकार की दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति के कारण गुजरात की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। इसके चलते घुसपैठ और सीमा पार तस्करी पर पूरी तरह रोक लगाने में सफलता मिली है।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सीमा से शून्य से 15 किलोमीटर के दायरे में सभी अवैध अतिक्रमणों के खिलाफ शून्य-सहनशीलता की नीति अपनाने और उन्हें हटाने के निर्देश दिए। साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में कट्टरपंथी गतिविधियों के संभावित केंद्रों पर कड़ी निगरानी रखने पर जोर दिया।
शाह ने कहा कि सीमावर्ती जिलों में जनसांख्यिकीय बदलावों की जिलाधिकारियों द्वारा नियमित निगरानी और रिपोर्टिंग की जानी चाहिए। उन्होंने औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के कारण इन क्षेत्रों में हो रहे रिवर्स माइग्रेशन को सकारात्मक संकेत बताया। उन्होंने कहा कि थाने से लेकर पटवारी स्तर तक सभी अधिकारियों को समन्वय के साथ काम करते हुए पहले से बसे अवैध घुसपैठियों की पहचान और निर्वासन सुनिश्चित करना चाहिए। इसके लिए प्रत्येक सीमावर्ती जिले की जरूरतों के अनुरूप मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने के निर्देश भी दिए गए। इनमें ड्रोन और मादक पदार्थों से जुड़े खतरों पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।
गृह मंत्री ने प्रत्येक जिले में सीमा सुरक्षा बल, भारतीय तटरक्षक बल, आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय और लीड बैंक प्रबंधक को शामिल करते हुए सुरक्षा समन्वय समूह गठित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि आयकर, सीमा शुल्क और धनशोधन निरोधक कानूनों के प्रभावी अनुपालन की जिम्मेदारी जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और सीमा क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक को मिलकर निभानी होगी।
शाह ने हवाला लेनदेन, संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों, म्यूल खातों, शेल कंपनियों, संदिग्ध वाहनों और जीएसटी संग्रह पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वित्तीय अपराधों से जुड़ी एजेंसियों को सीमावर्ती क्षेत्रों की गतिविधियों की नियमित जानकारी दी जानी चाहिए तथा आयकर विभाग को भारतीय रिजर्व बैंक के सहयोग से व्यापक सर्वेक्षण अभियान चलाना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा के निकट होने के कारण तटीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए और भारतीय तटरक्षक बल के साथ बेहतर समन्वय स्थापित किया जाना चाहिए। साथ ही ‘वाइब्रेंट विलेजेज’ कार्यक्रम के साथ केंद्र और राज्य सरकारों की सभी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ सीमावर्ती गांवों तक पहुंचाने के निर्देश भी दिए।