नई दिल्ली : देश में पहले से मौजूद ऊर्जा संबंधी चुनौतियों के बीच अब मौसम को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। भारतीय मौसम विभाग ने चालू मानसून सीजन के लिए सामान्य से काफी कम वर्षा होने की आशंका जताई है। विभाग का कहना है कि यदि मौजूदा परिस्थितियां बनी रहीं तो इस वर्ष को सूखे वाले वर्षों की श्रेणी में भी रखा जा सकता है। ऐसे हालात में नदियों, बांधों और जलाशयों में जलस्तर तेजी से घटने का खतरा है। साथ ही भूजल स्तर में भी उल्लेखनीय गिरावट आ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सबसे बड़ा असर देश के कृषि क्षेत्र पर पड़ सकता है।
मौसम विभाग की नई चेतावनी
भारतीय मौसम विभाग ने बताया है कि पहले मानसून के दौरान सामान्य वर्षा का लगभग 92 प्रतिशत होने का अनुमान लगाया गया था। हालांकि, नए गणितीय और जलवायु मॉडल के विश्लेषण में वर्षा की मात्रा घटकर लगभग 60 प्रतिशत तक पहुंचने की आशंका सामने आई है। विभाग के अनुसार, इस संभावित स्थिति के पीछे प्रमुख कारण ‘एल नीनो’ है।
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, ‘एल नीनो’ के प्रभाव से प्रशांत महासागर का सतही जल सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इस जलवायु परिवर्तन का असर विश्व के कई हिस्सों के मौसम पर पड़ता है। भारत में इसके कारण भीषण गर्मी पड़ सकती है और दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर हो सकता है, जिससे वर्षा में कमी आने की आशंका बढ़ जाती है।
जून में कई राज्यों के लिए लू का अलर्ट
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि जून महीने के दौरान देश के कई हिस्सों में अत्यधिक गर्मी महसूस की जा सकती है। विभाग के अनुसार कई राज्यों में सामान्य से अधिक दिनों तक हीटवेव यानी लू चलने की संभावना है।
जिन राज्यों को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है, उनमें उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु शामिल हैं।
हालांकि राजस्थान और झारखंड में इस बार सामान्य वर्षों की तुलना में अपेक्षाकृत कम हीटवेव दर्ज की जा सकती है।
मौसम विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने बताया है कि जून के दौरान ‘एल नीनो’ का प्रभाव कुछ कमजोर रह सकता है, लेकिन सितंबर तक इसके काफी मजबूत होने की संभावना है। यदि ऐसा होता है तो इसका सीधा असर देश के मानसून सीजन और वर्षा के वितरण पर पड़ सकता है।
मानसून की एंट्री में देरी की आशंका
इस वर्ष मानसून के आगमन में भी देरी होने की संभावना जताई गई है। इससे पहले मौसम विभाग ने अनुमान व्यक्त किया था कि 26 मई तक केरल में दक्षिण-पश्चिम मानसून दस्तक दे देगा। लेकिन ताजा आकलन के अनुसार अब मानसून केरल में अगले सप्ताह के दौरान किसी भी दिन प्रवेश कर सकता है।
मानसून की देरी और संभावित वर्षा कमी का असर खेती-किसानी पर पड़ने की आशंका है। किसानों की बुवाई का कार्यक्रम प्रभावित हो सकता है, जिससे फसलों का उत्पादन भी प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की आधे से अधिक कृषि भूमि आज भी वर्षा आधारित है। ऐसे में यदि मानसून कमजोर रहता है या पर्याप्त वर्षा नहीं होती तो कृषि क्षेत्र को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। खासतौर पर मध्य और पश्चिम भारत का वह कृषि क्षेत्र जिसे ‘मानसून कोर जोन’ कहा जाता है इस शुष्क मौसम की स्थिति से सबसे अधिक प्रभावित हो सकता है।