वॉशिंगटन, डी.सी. : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प एक बार फिर न्यायिक फैसले के कारण सुर्खियों में हैं। यह मामला राजधानी वाशिंगटन स्थित कला और सांस्कृतिक केंद्र ‘जॉन एफ. केनेडी सेंटर फॉर द परफॉर्मिंग आर्ट्स’ से जुड़ा है, जिसे पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी के सम्मान में नामित किया गया था। हाल ही में इस केंद्र के नाम को बदलकर ‘ट्रम्प केनेडी सेंटर’ कर दिया गया था।
सूत्रों के अनुसार अदालत ने स्पष्ट किया है कि इस प्रतिष्ठित सांस्कृतिक संस्थान के नाम में बदलाव करना कानूनी रूप से उचित नहीं था। अमेरिकी संघीय अदालत ने आदेश दिया है कि केंद्र से डोनाल्ड ट्रम्प का नाम हटाया जाए।
अदालत के अनुसार, इस प्रसिद्ध ‘केनेडी सेंटर फॉर द परफॉर्मिंग आर्ट्स’ का नाम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के नाम पर इस तरह से बदलना अवैध था। इसी आधार पर ट्रम्प का नाम हटाने का निर्देश दिया गया है।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष दिसंबर महीने में ‘जॉन एफ. केनेडी सेंटर फॉर द परफॉर्मिंग आर्ट्स’ का नाम बदल दिया गया था। यह कदम ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में उठाया गया था, जब उन्होंने स्वयं को इस संस्था का अध्यक्ष नियुक्त किया था। इसके बाद इस संस्थान की प्रबंधन समिति, जिसे ट्रम्प द्वारा नियुक्त सदस्यों से गठित किया गया था, ने नाम बदलकर ‘ट्रम्प केनेडी सेंटर’ करने के पक्ष में मतदान किया था। इस निर्णय पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं।
शुक्रवार को अमेरिकी संघीय अदालत के न्यायाधीश क्रिस्टोफर कूपर ने कहा कि इस तरह के नाम परिवर्तन का अधिकार केवल अमेरिकी कांग्रेस के पास है। अदालत ने यह भी कहा कि बोर्ड ने एकतरफा निर्णय लेकर अपनी कानूनी सीमा का उल्लंघन किया है। अदालत ने आदेश दिया है कि 14 दिनों के भीतर ट्रम्प का नाम हटाया जाए। इसी निर्णय के चलते उस भवन को मरम्मत के लिए दो वर्षों तक बंद रखने की योजना भी स्थगित कर दी गई है।
इस फैसले के बाद डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने न्यायाधीश की आलोचना करते हुए इस केंद्र को ‘मृतप्राय’ संस्था बताया है। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि वे स्वयं को इस परियोजना से अलग कर सकते हैं। अपने पोस्ट में ट्रम्प ने लिखा कि वे इस “असफल संस्था” को कांग्रेस को वापस सौंपने के लिए उनके साथ काम करेंगे ताकि आगे का निर्णय वही ले सके।
इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि जब तक उन्हें काम करने की स्वतंत्रता नहीं मिलेगी, तब तक वे इस स्थिति में आगे बढ़ने में कोई रुचि नहीं रखते और इसे उन्होंने निराशाजनक दिशा बताया।