लंदन : अमेरिका के बाद अब ब्रिटेन में भी भारतीयों को लेकर दिए गए एक विवादित बयान ने राजनीतिक और सामाजिक बहस छेड़ दी है। इस बार विवाद के केंद्र में ब्रिटेन के प्रसिद्ध सांसद रूपर्ट लो हैं, जिन्होंने हाल ही में इमिग्रेशन और रोजगार नीति पर टिप्पणी करते हुए भारतीय और पाकिस्तानी नागरिकों पर गंभीर आरोप लगाए।
रूपर्ट लो, जो पहले रिफॉर्म यूके से जुड़े थे और बाद में अलग होकर नई अति-दक्षिणपंथी पार्टी “रिस्टोर ब्रिटेन” की स्थापना की, ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि भारतीय और पाकिस्तानी नागरिक ब्रिटेन के लोगों की नौकरियां छीन रहे हैं। उन्होंने लिखा, “मुझे यह विश्वास नहीं है कि हमारे बेरोजगार नागरिक जो काम आसानी से कर सकते हैं, उसके लिए हमें लाखों पाकिस्तानी और भारतीयों को बुलाने की जरूरत है। उन्होंने आगे यह भी लिखा कि यदि इस बयान के लिए उन्हें नस्लवादी कहा जाता है, तो उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं है।
उनके इस पोस्ट के बाद ब्रिटेन में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। एक वर्ग ने उनके बयान का समर्थन करते हुए इसे “सच बोलने की हिम्मत” बताया, जबकि एक बड़े वर्ग ने इसे स्पष्ट रूप से नस्लवादी और विभाजनकारी करार दिया। कई लोगों ने इस बहस में ब्रिटेन के औपनिवेशिक इतिहास का भी उल्लेख किया और कहा कि ऐसे बयान समाज में तनाव बढ़ाते हैं।
यह पहली बार नहीं है जब रूपर्ट लो विवादों में आए हों। इससे पहले भी उन्होंने ब्रिटेन की इमिग्रेशन नीति की आलोचना करते हुए इसे “औपनिवेशिक प्रवास” से जोड़कर देखा था। उन्होंने कई बार यह दावा भी किया है कि कम कौशल वाले प्रवासियों को तीसरे विश्व के देशों से राजनीतिक लाभ के लिए ब्रिटेन में लाया गया।
उनकी टिप्पणियों पर आलोचकों का कहना है कि ऐसे बयान ब्रिटेन में रहने वाले दक्षिण एशियाई समुदाय, विशेषकर भारतीय मूल के कर्मचारियों के खिलाफ नकारात्मक माहौल पैदा करते हैं। वहीं कुछ विश्लेषकों का मानना है कि रूपर्ट लो इमिग्रेशन मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए जानबूझकर उभार रहे हैं।
रूपर्ट लो ने पहले भी मुस्लिम समुदाय और इमिग्रेशन को लेकर विवादित बयान दिए हैं। उन्होंने एक बार कहा था कि ब्रिटेन की सड़कों पर बुरका पहने महिलाओं की मौजूदगी उन्हें असहज करती है और मैनचेस्टर के कई इलाके तेजी से “इस्लामिक” होते जा रहे हैं।