नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत का खगोल विज्ञान से संबंध अत्यंत प्राचीन और समृद्ध रहा है। देश की वैज्ञानिक और सांस्कृतिक परंपराओं में आकाश, ग्रहों और तारों का विशेष महत्व रहा है। भारत में मौजूद सदियों पुरानी वेधशालाएं इस बात का प्रमाण हैं कि यहां खगोल विज्ञान और गणित के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हुए थे। नौवहन, पंचांग निर्माण और अनेक धार्मिक पर्व-त्योहार भी आकाशीय घटनाओं से जुड़े रहे हैं।
रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 134वें संस्करण को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि खगोल विज्ञान ने हर पीढ़ी में जिज्ञासा और खोज की भावना को जन्म दिया है। आज के युवा भी इस विषय को लेकर काफी उत्साहित हैं और देशभर में खगोल विज्ञान क्लबों की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। विज्ञान और अंतरिक्ष के प्रति युवाओं का यह बढ़ता आकर्षण भारत के भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत है।
मोदी ने बताया कि खगोल विज्ञान से जुड़ी गतिविधियां अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि छोटे कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों तक भी पहुंच रही हैं। उन्होंने ‘बैंगलोर एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संस्था नियमित अवलोकन सत्र आयोजित करती है और ग्रामीण क्षेत्रों में खगोल विज्ञान को लोकप्रिय बनाने के लिए विशेष अभियान भी चला रही है। इससे युवाओं और विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान को करीब से समझने का अवसर मिल रहा है।
उन्होंने ‘खैस्ट्रोनॉमी मंडल’ द्वारा शुरू किए गए 30 घंटे के अभिनव खगोल विज्ञान पाठ्यक्रम की भी सराहना की। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस तरह की पहलें युवाओं में वैज्ञानिक सोच विकसित करने के साथ-साथ उन्हें शोध और नवाचार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं। रात के समय तारों और ग्रहों का अवलोकन अपने आप में एक अनूठा और रोमांचक अनुभव होता है। उन्होंने ‘एस्ट्रो केरल’ संस्था का उदाहरण देते हुए बताया कि यह संगठन रात्रिकालीन अवलोकन शिविर और कार्यशालाएं आयोजित करता है। इन कार्यक्रमों में युवा प्रतिभागियों को दूरबीन बनाना, तारामंडल मानचित्रों का उपयोग करना तथा अंतरिक्ष से जुड़ी बुनियादी जानकारियां प्राप्त करना सिखाया जाता है।
उन्होंने राजकोट स्थित ‘बिग बैंग एस्ट्रोनॉमी क्लब’ की भी प्रशंसा की, जिसने गिर के जंगलों से लेकर कच्छ के रण तक विभिन्न स्थानों पर खगोल विज्ञान से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे प्रयास विज्ञान को लोगों के बीच ले जाने और युवाओं में अंतरिक्ष अनुसंधान के प्रति रुचि पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने देश की प्रमुख खगोलीय संस्थाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘ज्योतिर्विद्या परिसंस्था’ भारत की सबसे पुरानी खगोल विज्ञान संस्थाओं में से एक है। यहां अवलोकन सुविधाओं के अलावा पुस्तकालय और दूरबीन पुस्तकालय जैसी व्यवस्थाएं भी उपलब्ध हैं। उन्होंने ‘आईएसएएसी’ नामक छात्र-नेतृत्व वाले राष्ट्रीय नेटवर्क का भी जिक्र किया, जो देशभर के खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी क्लबों को एक मंच पर जोड़ने का कार्य कर रहा है। इससे विद्यार्थियों के बीच ज्ञान, अनुभव और शोध संबंधी जानकारी का आदान-प्रदान संभव हो रहा है।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने समाज सेवा से जुड़ी एक प्रेरक पहल का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पिछले महीने तमिलनाडु के नागरकोइल में उनकी मुलाकात शिक्षिका गिरिजा अम्मा से हुई, जिनसे वे लगभग 30 वर्ष पहले भी मिल चुके थे। गिरिजा अम्मा चेन्नई स्थित ‘जयगोपाल गरोड़िया हिंदू विद्यालय’ सहित तीन शिक्षण संस्थानों का संचालन करती हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘मन की बात’ कार्यक्रम से प्रेरित होकर गिरिजा अम्मा ने देश के सैनिकों के कल्याण के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया। उन्होंने अपने विद्यालयों के विद्यार्थियों को प्रतिदिन एक रुपया बचाकर सैनिकों के लिए योगदान देने के लिए प्रेरित किया। इस पहल के तहत प्रत्येक छात्र ने वर्षभर में 365 रुपये का योगदान दिया और हजारों विद्यार्थियों की छोटी-छोटी बचत से कुल 40 लाख रुपये की राशि एकत्र हुई। गिरिजा अम्मा ने यह पूरी राशि उनके माध्यम से सैनिक कल्याण के लिए समर्पित की। प्रधानमंत्री ने इस अभियान में भाग लेने वाले विद्यार्थियों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल देशभक्ति, सामाजिक जिम्मेदारी और सेवा भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देशभर में ऐसे अनेक सकारात्मक और प्रेरणादायक प्रयास हो रहे हैं, जिन्हें अक्सर पर्याप्त पहचान नहीं मिल पाती। उन्होंने लोगों से अपने आसपास हो रहे अच्छे कार्यों को देखने, समाज के लिए योगदान देने वाले व्यक्तियों का सम्मान करने तथा अवसर मिलने पर स्वयं भी किसी अच्छे उद्देश्य का हिस्सा बनने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ऐसे छोटे-छोटे प्रयास ही राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव तैयार करते हैं।