मालबाजार (उत्तर बंगाल): आज की रात खत्म होने के बाद बंगाल के सभी स्कूल सोमवार को खुल जाएंगे। स्कूल खुलते ही प्रार्थना संगीत के रूप में 'बंदे मातरम' गाने का निर्देश पहले ही विकास भवन से दिया गया है। केवल गाना ही नहीं, इसके वीडियो को शिक्षकों के समूह में अपलोड करने का निर्देश भी दिया गया है। पहले दिन ही इसे कैसे संभव बनाया जा सके, इस पर शिक्षक और शिक्षिकाएँ उलझन में हैं।
गत 12 मई को नई सरकार के शपथ लेने के तीन दिन बाद राज्य के सभी स्कूलों में प्रार्थना गीत के रूप में 'बंदे मातरम्' गाने का निर्देश लागू हुआ। इस निर्देश को प्रत्येक जिले के शिक्षा अधिकारी को भी भेजा गया। उस समय स्कूलों में ग्रीष्मावकाश चल रहा था। आज, रविवार को अवकाश समाप्त हो रहा है। इसलिए पहला जून स्कूल खुलने के बाद गाने के साथ उसका वीडियो भी साझा करने के लिए कहा गया है। जलपाईगुड़ी जिले के एक शिक्षा अधिकारी ने कहा, 'बंदे मातरम् गाकर प्रत्येक स्कूल को वीडियो भेजने का निर्देश दिया गया है।'
इस निर्देश में प्राथमिक स्कूल के शिक्षकों को परेशानी हुई है। अधिकांश स्कूलों में म्यूजिक सिस्टम नहीं है। छोटे बच्चों को गीतों की आदत डालने के लिए इस सिस्टम की आवश्यकता थी। गीत सुनकर उसे सही तरीके से गाने की प्रशिक्षण देने की योजना शिक्षकों की थी। लेकिन, चालू वित्तीय वर्ष में जो पैसा आवंटित किया गया था, अधिकांश स्कूलों ने उसे खर्च कर दिया है, इसलिए म्यूजिक सिस्टम खरीदने की क्षमता नहीं है। मालबाजार सर्किल के एक स्कूल के प्रधान शिक्षक तापस बनर्जी के अनुसार, 'बिजली का बिल चुकाने, चॉक, कॉपी, डस्टर खरीदने, मरम्मत के लिए आवंटित पैसा खर्च हो गया है। इसलिए अलग से धन आवंटित नहीं किया गया तो साउंड सिस्टम खरीदना संभव नहीं है।'
इसके साथ कठिन संस्कृत पंक्तियों के उच्चारण को लेकर चिंता है। गर्मुरा राष्ट्रीय उद्यान के पास बिछाभांगा क्षेत्र के शिक्षक सुदीप मुखर्जी कहते हैं, 'बंदे मातरम थोड़ी कठिन गाना है। नया गाना लाने में समय लगेगा। आदिवासी समाज के बच्चों को कम से कम दो सप्ताह का समय देना होगा।' इस स्थिति में अगर गाने का वीडियो ग्रुप में शेयर किया जाए, तो उसमें त्रुटियाँ पकड़ी जाएंगी। इस को लेकर शिक्षकों को चिंता है। निखिल बंग प्राइमरी शिक्षक संगठन के जलपाईगुड़ी जिले के सचिव बिप्लव झा कहते हैं, 'राज्य के निर्देश का हमें पालन करना होगा। बंदे मातरम सभी गाएंगे। लेकिन यह भी सही है कि एक ही दिन में पूरा गाना गाना संभव नहीं है।'
हालांकि इसके बावजूद अखिल भारतीय राज्य शैक्षिक महासंघ के सिलीगुड़ी शिक्षा जिला के अध्यक्ष अभिजीत मजूमदार आशावादी हैं। वे कहते हैं, 'संरचना की समस्याओं को दूर करके अगर यह गाना सिखाया जा सके तो पहले दिन से हम इसे सही तरीके से गा पाएंगे। इस पर मेरा विश्वास है।'