लंदन: ब्रिटेन में एक हत्या के मामले के बाद कृपाण पर प्रतिबंध लगाने की उठी मांगों का सिख संगठनों ने विरोध किया है। उनका कहना है कि किसी एक अपराधी की हरकत के लिए पूरे सिख समुदाय को जिम्मेदार ठहराना अनुचित होगा।
यह विवाद उस समय बढ़ा जब 23 वर्षीय विक्रम डिग्वा को 18 वर्षीय हेनरी नोवाक की चाकू मारकर हत्या का दोषी ठहराया गया। साउथैम्पटन क्राउन कोर्ट ने गुरुवार को उसकी मां, 53 वर्षीय किरण कौर को भी अपराधी की सहायता करने के मामले में दोषी पाया। घटना पिछले वर्ष दिसंबर की है, जिसमें हेनरी नोवाक की 21 सेंटीमीटर लंबे खंजर से हत्या की गई थी।
मुकदमे के दौरान विक्रम डिग्वा ने हत्या के आरोपों से इनकार करते हुए दावा किया था कि उसने आत्मरक्षा में उस चाकू का इस्तेमाल किया, जिसे वह धार्मिक परंपरा के तहत अपने साथ रखता था। इस मामले के बाद कृपाण को लेकर बहस छिड़ गई और ‘रिस्टोर ब्रिटेन पार्टी’ जैसे कुछ दक्षिणपंथी संगठनों ने इस पर प्रतिबंध लगाने की मांग की।
‘सिटी सिख्स फाउंडेशन’ ने एक बयान में कहा कि किसी एक व्यक्ति के अपराध के आधार पर पूरे समुदाय को निशाना बनाना गलत है। संस्था ने कहा कि ब्रिटेन का सिख समुदाय देश के सबसे कानून का पालन करने वाले और अच्छी तरह समाहित समुदायों में से एक है, जिसका यहां 160 वर्ष से अधिक पुराना इतिहास रहा है।
संगठन ने स्पष्ट किया कि कृपाण खालसा परंपरा में दीक्षित सिखों की आस्था का प्रतीक है। यह समाज के कमजोर और जरूरतमंद लोगों की रक्षा करने की जिम्मेदारी की याद दिलाती है और पीढ़ियों से ब्रिटेन में जिम्मेदारी के साथ धारण की जाती रही है।
फाउंडेशन ने हेनरी नोवाक की हत्या की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि वह इस जघन्य अपराध और इसके लिए जिम्मेदार व्यक्ति की पूरी तरह भर्त्सना करता है। संगठन ने लोगों से संयम और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील भी की।
मुकदमे के दौरान न्यायाधीश विलियम माउसली ने कहा कि ब्रिटेन के कानून के तहत कृपाण या धारदार वस्तु को धार्मिक कारणों अथवा आत्मरक्षा के उद्देश्य से रखा जा सकता है। वहीं अभियोजक निकोलस लॉबेनबर्ग ने जूरी से कहा कि यह मामला न तो सिख धर्म से जुड़ा है और न ही नस्लवाद से, बल्कि यह एक हत्या का मामला है। बाद में जूरी ने विक्रम डिग्वा को हत्या और धारदार हथियार रखने का दोषी ठहराया।
‘सिख फेडरेशन यूके’ ने भी इस अवैध हत्या की निंदा की और कहा कि इस मामले ने अनावश्यक रूप से सामुदायिक तनाव बढ़ाने का काम किया है। संगठन का कहना है कि जिस हथियार का इस्तेमाल किया गया, वह संभवतः वह सामान्य कृपाण नहीं थी जिसे आस्थावान सिख धारण करते हैं, और यह अंतर समझना बेहद जरूरी है।
संगठन ने कहा कि कानून केवल धार्मिक कारणों से कृपाण धारण करने वाले पूर्ण रूप से आस्थावान सिखों को ही कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है। यदि किसी कृपाण या अन्य धारदार वस्तु का इस्तेमाल हिंसक या आक्रामक कृत्य में किया जाता है, तो वह कानूनी संरक्षण समाप्त हो जाता है और उसे आक्रामक हथियार माना जाता है। इस मामले में हैम्पशायर एवं आइल ऑफ वाइट कांस्टेबुलरी के पुलिस अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। स्वतंत्र पुलिस आचरण कार्यालय (आईओपीसी) इस बात की जांच कर रहा है कि घटनास्थल पर पहुंचने के बाद अधिकारियों ने घायल हेनरी नोवाक को हथकड़ी क्यों लगा दी थी।
अदालत में बताया गया कि विक्रम डिग्वा ने पुलिस से दावा किया था कि उसे नस्लीय धमकियां दी गई थीं और उसने किसी हथियार के इस्तेमाल से भी इनकार किया था। बाद में जब हेनरी नोवाक की हालत की गंभीरता स्पष्ट हुई तो पुलिस ने हथकड़ी हटा दी और एम्बुलेंस बुलाई गई। कांस्टेबुलरी के कार्यवाहक उप मुख्य कांस्टेबल रॉबर्ट फ्रांस ने कहा कि उन्हें इस बात का गहरा अफसोस है कि बेहोश होने से पहले हेनरी नोवाक को हथकड़ी लगाकर गिरफ्तार किया गया था।
विक्रम डिग्वा को सोमवार को सजा सुनाई जाएगी, जबकि उसकी मां किरण कौर को 17 जुलाई को सजा सुनाई जानी है। अभियोजन के अनुसार, उन्होंने 4 दिसंबर की सुबह दक्षिण-पूर्व इंग्लैंड के पोर्ट्सवुड क्षेत्र में अपराध स्थल से आठ इंच लंबे हत्या में प्रयुक्त हथियार को हटाने में भूमिका निभाई थी।
इस बीच ‘रिफॉर्म यूके’ के सांसद रॉबर्ट जेनरिक ने गृह सचिव शबाना महमूद को पत्र लिखकर पुलिस के ‘एंटी-रेसिस्ट प्रशिक्षण कार्यक्रमों’ की व्यापक समीक्षा की मांग की है। उन्होंने कहा कि हेनरी नोवाक की दुखद मृत्यु को ऐसा मोड़ साबित होना चाहिए, जहां कानून के समक्ष समानता के सिद्धांत के आधार पर सभी के साथ निष्पक्ष व्यवहार सुनिश्चित किया जाए।