नयी दिल्लीः दिल्ली से एक भीषण दुर्घटना की खबर सामने आ रही है। साकेत इलाके में पांच मंजिला इमारत गिर गई है, जिसके मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका है। घटना का पता चलते ही मौके पर रेस्क्यू टीम पहुंची और मलबे को हटाने के काम में लग गई। अब तक 9 लोगों को रेस्क्यू किया गया है। मौके पर मौजूद अधिकारियों के अनुसार, पूरी पांच मंजिला इमारत भरभराकर गिर गई और कुछ ही क्षणों में मलबे के बड़े ढेर में तब्दील हो गई।
वहीं लोकल बता रहे हैं कि पराठे खिलाने वाली आंटी की मौत हो गई है। उस समय जो भी उनके मेस में खाना खा रहे थे। वे सब मलबे के नीचे दबे हुए हैं। संख्या बड़ी हो सकती है।
शनिवार की शाम 07:44 बजे दमकल विभाग को घटना की सूचना मिली थी। जानकारी के मुताबिक इमारत के अंदर और आसपास कई लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है, लेकिन फिलहाल किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है।
सात लोगों को सुरक्षित निकाला गया
बचाव दल फिलहाल घटनास्थल पर सक्रिय हैं। अग्निशमन विभाग के अनुसार, उन्हें शाम 7:44 बजे सूचना मिली थी। अग्निशमन विभाग के अधिकारी ने बताया, 'हमने घटनास्थल पर चार दमकल गाड़ियां भेजी हैं और आगे की जानकारी का इंतजार है।' अब तक मलबे से सात लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। इन घायलों को प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल भेज दिया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।
भूतल पर संचालित होता था कोचिंग संस्थान
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इमारत के भूतल पर एक कोचिंग संस्थान संचालित होता था, जबकि ऊपरी मंजिलों पर निर्माण कार्य चल रहा था। आशंका जताई जा रही है कि मलबे में फंसे लोगों में छात्र भी शामिल हो सकते हैं। एक स्थानीय निवासी ने बताया कि यह कांच की बाहरी दीवारों वाली एक व्यावसायिक इमारत थी। फिलहाल यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि हादसे के समय अंदर कितने लोग मौजूद थे। आमतौर पर इस इमारत में 300 से 400 लोग रहते थे, हालांकि उम्मीद है कि हादसे के वक्त अंदर लोगों की संख्या कम रही होगी।
स्थानीय लोगों के अनुसार, हादसे का असर आसपास की कुछ छोटी इमारतों तक सीमित रहा और आसपास की अन्य इमारतें सुरक्षित हैं। बताया गया कि इमारत से सटी एक छोटी बिल्डिंग, जिसमें एक मेस संचालित होता था, वह भी प्रभावित हुई है। वहां मौजूद लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और कुछ मामूली चोटों को छोड़कर किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है।
फिलहाल राहत और बचाव दल मलबे में लगातार सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं, क्योंकि अभी भी कुछ लोगों के अंदर फंसे होने की आशंका है। भीड़ की वजह से प्रशासन ने पूरे इलाके को घेर लिया है और सभी एजेंसियां मिलकर तेजी से राहत कार्य में जुटी हुई हैं।
पूरे इलाके में फैला मलबा
एक अन्य स्थानीय निवासी ने कहा कि यह एक व्यावसायिक इमारत थी, जहां छात्र पढ़ाई करते थे और लोग काम भी करते थे। यदि यह हादसा कार्यालय समय के दौरान हुआ होता तो मृतकों की संख्या कहीं अधिक हो सकती थी। मेरा मानना है कि इस समय भी तीन या चार लोग नाइट शिफ्ट में काम कर रहे होंगे, जो घायल हो सकते हैं या उनकी जान भी जा सकती है। निर्माण की गुणवत्ता बेहद खराब थी।
घटनास्थल से सामने आए दृश्य में पूरी इमारत कंक्रीट, मुड़े हुए लोहे और टूटे हुए खंभों के ढेर में तब्दील नजर आई। मलबा पूरे इलाके में फैला हुआ था। हादसे के बाद स्थानीय निवासी और पड़ोसी टॉर्च तथा मोबाइल फोन की रोशनी लेकर मौके पर पहुंचे और नुकसान का जायजा लेने के साथ यह पता लगाने की कोशिश करने लगे कि कहीं कोई व्यक्ति मलबे में फंसा तो नहीं है।
राहत और बचाव कार्य जारी
दमकल कर्मियों और पुलिस टीमों ने राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया है। इस दौरान चिंतित स्थानीय लोग भी मलबे की तलाश में जुटे दिखाई दिए। संकरी गली और घनी आबादी वाले इलाके में अफरातफरी का माहौल रहा। लोग बचाव वाहनों और कर्मियों के लिए रास्ता खाली कराने की अपील करते नजर आए। कई लोगों ने खोज अभियान में मदद के लिए अपने मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट का इस्तेमाल किया। फिलहाल आसपास की अन्य इमारतों को किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है।
हादसे पर सीएम रेखा का बयान
दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने इस हादसे पर कहा कि 'साकेत मेट्रो स्टेशन के पास इमारत ढहने की घटना बेहद चिंताजनक है। एनडीआरएफ, दिल्ली अग्निशमन सेवा, दिल्ली पुलिस, दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए), एमसीडी, कैट्स और सिविल डिफेंस की टीमें युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने और प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और सभी संबंधित एजेंसियां आपसी समन्वय के साथ काम कर रही हैं। प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा और कुशलक्षेम हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।'