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ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन प्रणाली को लेकर सवाल के बाद सीबीएसई ने साइबर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की

बोर्ड का कहना है कि चिह्नित कमजोरियों को नियंत्रित कर लिया गया है और अन्य संभावित जोखिमों की भी जांच जारी है।

By डॉ. अभिज्ञात

May 31, 2026 15:31 IST

नई दिल्लीः केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने अपनी ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर जारी विवाद के बीच कहा है कि वह अपने सेवा प्रदाता के ‘ऑनमार्क’ पोर्टल में सामने आई सुरक्षा संबंधी कमजोरियों पर लगातार नजर बनाए हुए है। बोर्ड ने पोर्टल की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की विशेष टीम तैनात की है।

सीबीएसई ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी बयान में बताया कि पिछले कुछ दिनों से विभिन्न सरकारी एजेंसियों और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की एक संयुक्त टीम इस प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए काम कर रही है। बोर्ड के अनुसार, पोर्टल को अधिक सुरक्षित ढांचे में स्थानांतरित करने सहित कई कदम उठाए गए हैं। जिन सुरक्षा खामियों की पहचान की गई थी, उन्हें नियंत्रित कर लिया गया है। साथ ही यह सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत जांच जारी है कि प्रणाली में ऐसी कोई अन्य कमजोरी शेष न रहे, जिसका दुरुपयोग किया जा सके।

सीबीएसई ने उन जागरूक नागरिकों और एथिकल हैकर्स का भी आभार व्यक्त किया, जिन्होंने संभावित सुरक्षा खामियों की ओर ध्यान आकर्षित किया। बोर्ड ने बताया कि इनमें से कुछ लोगों से सीधे संपर्क कर आवश्यक जानकारी भी प्राप्त की गई है।

अपने बयान में सीबीएसई ने कहा कि सार्वजनिक मंचों पर सामने लाई जा रही ‘ऑनमार्क’ पोर्टल की कमजोरियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की टीम इन प्रणालियों को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। बोर्ड का कहना है कि पहचानी गई कमजोरियों को दूर कर दिया गया है और अन्य संभावित जोखिमों की भी जांच की जा रही है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद सीबीएसई को अपने पोर्टल में तकनीकी गड़बड़ियों और मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाओं में कथित विसंगतियों को लेकर बढ़ते सवालों का सामना करना पड़ रहा है।

इससे पहले लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली के लिए अपनाई गई निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि एक विशेष कंपनी को अनुबंध दिलाने के लिए तकनीकी मानकों में बार-बार बदलाव किए गए।

राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर एक मीडिया रिपोर्ट साझा करते हुए दावा किया था कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने ‘कोएम्प्ट’ नामक कंपनी को अनुबंध देने से पहले निविदा की शर्तों में कई बार संशोधन किए। उनके अनुसार, इस प्रक्रिया के दौरान स्कैनिंग रिजॉल्यूशन मानक, रोबोटिक स्कैनर की अनिवार्यता और सॉफ्टवेयर प्रमाणन से जुड़े कई तकनीकी मानकों में ढील दी गई थी। हालांकि सीबीएसई ने वर्तमान बयान में पोर्टल की सुरक्षा को लेकर उठे मुद्दों पर अपनी कार्रवाई का विवरण साझा करते हुए कहा है कि प्रणाली की सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

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