नई दिल्लीः नई दिल्ली में सोमवार को संसद भवन एनेक्सी में शिक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर चिंता जताई गई।
समिति ने स्पष्ट कहा कि परीक्षा प्रणाली में किसी भी तरह की खामी का सीधा असर छात्रों पर पड़ता है, जो अपने भविष्य को लेकर सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। सूत्रों के अनुसार, सदस्यों ने जोर देकर कहा कि शिक्षा से जुड़े मुद्दों का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए, लेकिन परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।
“नुकसान हमेशा छात्रों का होता है” - समिति की टिप्पणी
बैठक के दौरान समिति ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, “चाहे सिस्टम में खामी हो या सरकार में, नुकसान हमेशा छात्रों का ही होता है।”
यह टिप्पणी उस समय आई जब नीट परीक्षा को लेकर चल रही अनियमितताओं और विवादों पर चर्चा हो रही थी। समिति के सदस्यों ने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिस पर छात्रों और अभिभावकों का पूरा भरोसा बना रहे, क्योंकि यह देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा है।
एनटीए और परीक्षा प्रणाली पर गहन चर्चा
यह बैठक तीन घंटे से अधिक समय तक चली, जिसकी अध्यक्षता कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने की। इसमें राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के महानिदेशक अभिषेक सिंह और शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में आगामी रि-नीट परीक्षा और एनटीए की कार्यप्रणाली को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। इसके अलावा कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) प्रणाली को अपनाने के मुद्दे पर भी विचार हुआ, हालांकि इस पर विस्तृत चर्चा आगे के लिए तय की गई है।
समिति ने पारंपरिक पेन-पेपर परीक्षा और कंप्यूटर आधारित परीक्षा दोनों मॉडलों के फायदे और चुनौतियों की समीक्षा भी की।
नीट विवाद और रि-नीट की तैयारी
नीट-यूजी परीक्षा को लेकर पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों के बाद एनटीए पहले से ही जांच के दायरे में है। इस विवाद ने देशभर में छात्रों और अभिभावकों के विरोध-प्रदर्शन को जन्म दिया था। मामले की जांच कई एजेंसियों द्वारा की गई और सर्वोच्च न्यायालय की भी इसमें भूमिका रही।
अधिकारियों के अनुसार, रि-नीट-यूजी परीक्षा 21 जून को आयोजित की जाएगी, जिसका उद्देश्य देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा पर भरोसा बहाल करना है।
सरकार और समिति दोनों का मानना है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता बढ़ाना भविष्य में ऐसे विवादों को रोकने के लिए जरूरी है।