पुरीः पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में आगामी स्नान पूर्णिमा और रथ यात्रा को लेकर तैयारियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं और मंदिर प्रशासन ने दोनों प्रमुख धार्मिक आयोजनों के लिए अनुष्ठानों, समय-सारिणी और व्यवस्थाओं का पूरा खाका तैयार कर दिया है। श्री जगन्नाथ मंदिर के मुख्य प्रशासक अरविंद के . पाढ़ी ने बताया कि इस संबंध में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में सभी तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई, जिसमें धार्मिक विधियों के साथ-साथ प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया गया ताकि श्रद्धालुओं को सुचारू और सुरक्षित अनुभव मिल सके। उन्होंने यह भी बताया कि भीड़ प्रबंधन, संचालन व्यवस्था और अन्य सभी तकनीकी व प्रशासनिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए व्यापक योजना बनाई गई है ताकि दोनों बड़े आयोजनों को बिना किसी बाधा के सफलतापूर्वक संपन्न कराया जा सके।
उन्होंने आगे जानकारी दी कि तैयारियों के चलते फिलहाल रत्न भंडार की इन्वेंट्री प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है, जिसे आगामी समय में फिर से शुरू किया जाएगा। रथ यात्रा हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण वार्षिक उत्सव है, जो ओडिशा के पुरी शहर में आयोजित होता है, जिसमें भगवान जगन्नाथ, उनके भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा को भव्य रूप से सजाए गए रथों में श्री जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर तक ले जाया जाता है, जिसे उनकी मौसी का घर माना जाता है। इस यात्रा में लाखों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर रथों को खींचने की परंपरा निभाते हैं, जो इसे एक अद्वितीय आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयोजन बनाता है।
देवता गुंडिचा मंदिर में लगभग एक सप्ताह तक विराजमान रहते हैं, जिसके बाद उनकी वापसी यात्रा यानी बहुड़ा यात्रा आयोजित होती है, जिसमें नंदीघोष, तालध्वज और दर्पदलन रथों की भव्य वापसी का दृश्य देखने को मिलता है। इस दौरान अधर पना नामक विशेष अनुष्ठान भी होता है, जिसमें दूध, चीनी और अन्य सामग्रियों से बना पवित्र पेय विशेष मिट्टी के पात्रों में तैयार कर देवताओं को अर्पित किया जाता है और इसे रथों पर ही संपन्न किया जाता है।
श्री जगन्नाथ मंदिर भगवान विष्णु के अवतार भगवान जगन्नाथ को समर्पित एक प्रमुख तीर्थ स्थल है, जिसे 12वीं शताब्दी में राजा अनंतवर्मन चोड़गंग देव ने बनवाया था और यह कलिंग वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है, जहां देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।