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समय से पहले नहीं बल्कि तय समय से भी लेट चल रहा है मानसून, क्यों ठिठक गया? IMD ने क्या बताया

आमतौर पर हर साल अगर मानसून की गति सही रहती है तो यह 1 जून तक केरल में दस्तक दे देता है लेकिन इस साल मानसून अपने तय समय से भी 2-3 दिनों बाद ही केरल पहुंचेगा।

By Moumita Bhattacharya

Jun 02, 2026 10:56 IST

मौसम विभाग (IMD) ने पूर्वानुमान लगाया था कि इस साल तय समय से काफी पहले ही मानसून भारत में केरल तट पर दस्तक देगा। कहा तो यहां तक गया था कि 26 मई को भी मानसून केरल पहुंच जाएगा। लेकिन अब मौसम विभाग का कहना है कि इस साल मानसून अपने तय समय से भी 2-3 दिनों बाद ही केरल पहुंचेगा। क्यों मानसून निर्धारित समय से देर से पहुंच रहा है? मौसम विभाग (IMD) ने इस बारे में क्या बताया?

आमतौर पर हर साल अगर मानसून की गति सही रहती है तो यह 1 जून तक केरल में दस्तक दे देता है जिसके बाद धीरे-धीरे देश के बाकी हिस्सों तक जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स में मौसम विभाग के हवाले से बताया गया कि अगले 2-3 में मानसून के केरल में प्रवेश करने लायक अनुकूल परिस्थितियां बनती दिखायी दे रही हैं।

अब सवाल यह उठता है कि पहले जहां अनुमान लगाया गया था कि मानसून 26 मई तक भारत पहुंच जाएगा, वहां अचानक बीच रास्ते में मानसून कहां अटक गया?

IMD ने क्या बताया?

हिंदुस्तान की मीडिया रिपोर्ट में मौसम विभाग के हवाले से दावा किया जा रहा है कि मानसून अपने निर्धारित समय यानी 22 मई से लगभग 5-6 दिन पहले ही अंडमान-निकोबार द्वीप समूह पर पहुंच चुका था। लेकिन इसके बाद बीच रास्ते में कुछ समय के लिए ठिठक गया है।

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मौसम विभाग का कहना है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून अगले 2-3 दिनों में केरल, लक्षद्वीप और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में पहुंचने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं। संभावना है कि अगर इसी रफ्तार से मानसून आगे बढ़ता रहा तो 3 जून तक यह तटवर्तीय इलाकों में दस्तक दे सकता है।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि श्रीलंका के पास मौसमी दबाव के कम होने और चक्रवाती परिस्थितियों की वजह से यह रुक गया है। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में हवाओं का उचित दबाव नहीं बन पाने की वजह से मानसून अपने निर्धारित से लगभग 6 दिनों पहले अंडमान-निकोबार द्वीप समूह तक पहुंचने के बावजूद बंगाल की खाड़ी में आगे नहीं बढ़ पाया।

बताया जाता है कि वर्तमान में मानसून का एक सिरा श्रीलंका में ही फंसा हुआ है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक मानसून और देर से शुरू होने वाली वर्षा का एक कारण प्रशांत महासागर में अल-नीनो के प्रभाव का एक्टिवेट होना भी है। यह भारतीय मानसून पैटर्न को प्रभावित कर रहा है।

अल-नीनो के प्रभाव से कम वर्षा

मीडिया रिपोर्ट में मौसम विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया है कि इस साल भारत में 90 प्रतिशत LPA की वर्षा होने की संभावना है। LPA का अर्थ किसी क्षेत्र में एक निश्चित समयकाल यानी एक महीने या बारिश के पूरे सीजन के दौरान होने वाली औसत बारिश है जिसकी गणना आमतौर 30 से 50 सालों के आंकड़ों के आधार पर की जाती है।

यदि किसी साल मानसून के दौरान 90 प्रतिशत से कम बारिश होती है तो IMD उसे 'कम वर्षा वाला' मानसून घोषित करता है। IMD के मुताबिक किसी भी साल कम वर्षा का होना अल-नीनो के प्रभाव की वजह से होता है।

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किस राज्य में कैसा रहेगा मौसम?

1 से 5 जून के बीच दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इसके साथ हल्की आंधी की भी संभावना जतायी गयी है।

वहीं 2 से 5 जून तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश की संभावना जतायी गयी है। 3 और 4 जून को यहां तेज आंधी की चेतावनी जारी की गयी है। राजस्थान में भी तूफानी हवाओं के साथ-साथ 3 से 6 जून के बीच में तेज आंधी और कुछ इलाकों में ओलावृष्टि की आशंका जतायी गयी है।

बात अगर पश्चिम बंगाल की करें तो यहां भी राहत खत्म और चिलचिलाती धूप और गर्मी के दिन फिर से आए वापस आ गए। मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार दक्षिण बंगाल में बारिश की फिलहाल कोई संभावना नहीं है। इस वजह से गर्मी बढ़ने के साथ-साथ उमस भी बढ़ेगी।

अगले कुछ दिनों में दक्षिण बंगाल का तापमान 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। हालांकि दक्षिण बंगाल से बिल्कुल अलग उत्तर बंगाल में फिलहाल भारी बारिश की संभावना जतायी जा रही है। कोलकाता का न्यूनतम तापमान 28.8 सेल्सियस और अधिकतम तापमान 35.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

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