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सुप्रीम कोर्ट की ताकत बढ़ी, नई नियुक्तियों के बाद जजों की संख्या 37 तक पहुंची

सीजेआई सूर्यकांत ने दिलाई शपथ, कोलेजियम की सिफारिश के बाद केंद्र की मंजूरी; महिला प्रतिनिधित्व पर भी बढ़ी उम्मीदें।

By श्वेता सिंह

Jun 02, 2026 12:28 IST

नई दिल्लीः देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को न्यायिक विस्तार देखने को मिला, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने पांच नए न्यायाधीशों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इन नियुक्तियों के साथ सुप्रीम कोर्ट में जजों की कुल संख्या बढ़कर 37 हो गई है।

शपथ ग्रहण समारोह सुप्रीम कोर्ट परिसर में आयोजित किया गया, जहां पांचों न्यायाधीशों ने अपने पद की शपथ ली।

किन जजों को मिली सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति?

नए नियुक्त न्यायाधीशों में न्यायमूर्ति शील नागू (पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश), न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर (बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश), न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा (मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश), न्यायमूर्ति अरुण पल्ली (जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश) और वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना शामिल हैं।

कोलेजियम की सिफारिश के बाद मिली मंजूरी

इन नामों की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने 22 और 27 मई को हुई बैठकों में केंद्र सरकार को भेजी थी। इसके बाद 1 जून को केंद्र सरकार ने इन नियुक्तियों को मंजूरी प्रदान की। राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 124(2) के तहत इन नामों पर अंतिम स्वीकृति दी।

महिला प्रतिनिधित्व में संभावित बढ़ोतरी

वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना की नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट में महिला प्रतिनिधित्व के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्तमान में शीर्ष अदालत में केवल एक महिला न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना हैं। अगस्त 2021 के बाद यह पहली बार है जब किसी महिला की सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति हुई है।

सुप्रीम कोर्ट लगभग पूरी क्षमता पर

हाल ही में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की स्वीकृत न्यायाधीश संख्या 34 से बढ़ाकर 38 कर दी थी। वर्तमान में 37 न्यायाधीशों के साथ शीर्ष अदालत अपनी लगभग पूरी क्षमता के साथ काम कर रही है। आने वाले दिनों में दो और रिक्तियां उत्पन्न होने की संभावना भी जताई जा रही है।

न्यायिक व्यवस्था को मिलेगी मजबूती

विशेषज्ञों का मानना है कि नए न्यायाधीशों की नियुक्ति से सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के निपटारे की गति बढ़ेगी और विभिन्न संवैधानिक, आपराधिक और दीवानी मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी। इससे न्यायिक प्रणाली की कार्यक्षमता और मजबूत होने की उम्मीद है।

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