नई दिल्लीः देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था से जुड़े दो महत्वपूर्ण विषय मंगलवार को संसद की एक प्रमुख समिति के एजेंडे में शामिल हैं। शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल मामलों से संबंधित संसदीय स्थायी समिति संसद भवन एनेक्सी में आयोजित बैठक में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की परीक्षा मूल्यांकन प्रणाली और माध्यमिक स्तर पर लागू तीन-भाषा सूत्र की स्थिति की विस्तृत समीक्षा करेगी।
बैठक शुरू हो चुकी है। आज की बैठक में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों को भी अपने विचार रखने के लिए बुलाया गया है। समिति का उद्देश्य यह समझना है कि हाल के वर्षों में लागू की गई व्यवस्थाएं विद्यार्थियों, शिक्षकों और परीक्षा प्रणाली को किस प्रकार प्रभावित कर रही हैं।
ऑन-स्क्रीन मार्किंग व्यवस्था पर उठ रहे सवालों की होगी समीक्षा
बैठक का प्रमुख विषय सीबीएसई की कक्षा 12 बोर्ड परीक्षाओं में अपनाई गई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली रहेगा। इस तकनीक के तहत परीक्षकों द्वारा उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन डिजिटल माध्यम से किया जाता है।
समिति यह जानने का प्रयास कर रही है कि इस प्रणाली से मूल्यांकन प्रक्रिया में कितनी पारदर्शिता और गति आई है। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि कहीं नई व्यवस्था के कारण छात्रों को किसी प्रकार की कठिनाइयों का सामना तो नहीं करना पड़ा। परीक्षा परिणामों की गुणवत्ता, मूल्यांकन की निष्पक्षता और उत्तर पुस्तिकाओं की जांच प्रक्रिया की प्रभावशीलता भी चर्चा के केंद्र में रहेगी।
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था परीक्षा प्रक्रिया को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जाती है, लेकिन इसके व्यावहारिक प्रभावों का लगातार आकलन भी आवश्यक है। इसी संदर्भ में समिति विस्तृत जानकारी जुटाएगी।
तीन-भाषा सूत्र के क्रियान्वयन पर भी होगी गहन चर्चा
बैठक में माध्यमिक शिक्षा स्तर पर लागू तीन-भाषा सूत्र की प्रगति और उसके प्रभाव का भी मूल्यांकन किया जाएगा। विशेष रूप से कक्षा 9 और 10 में इस नीति के क्रियान्वयन की स्थिति पर विचार होगा।
समिति विभिन्न राज्यों में भाषा नीति के अनुपालन, छात्रों के शैक्षणिक बोझ, क्षेत्रीय भाषाओं की भूमिका तथा भाषा शिक्षा से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं पर जानकारी लेगी। यह विषय राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रमुख बिंदुओं में शामिल रहा है और इसे लेकर अलग-अलग राज्यों में विभिन्न दृष्टिकोण देखने को मिले हैं।
वरिष्ठ अधिकारी रखेंगे अपना पक्ष
बैठक में शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव और सीबीएसई के अध्यक्ष समिति के समक्ष प्रस्तुति देंगे। दोनों अधिकारी वर्तमान व्यवस्थाओं, चुनौतियों और भविष्य की योजनाओं पर जानकारी साझा करेंगे।
समिति उनके सुझावों और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर अपनी टिप्पणियां तैयार कर सकती है। भविष्य में परीक्षा सुधारों और भाषा नीति से संबंधित किसी भी सिफारिश में इन चर्चाओं की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।
परीक्षा सुधारों और शिक्षा नीति पर बढ़ी निगरानी
हाल के वर्षों में शिक्षा क्षेत्र में कई सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं। परीक्षा मूल्यांकन को अधिक पारदर्शी बनाने, तकनीक के उपयोग को बढ़ाने और नई शिक्षा नीति के अनुरूप पाठ्यक्रम व भाषा व्यवस्था को मजबूत करने के प्रयास लगातार जारी हैं। ऐसे में संसदीय समिति की यह समीक्षा बैठक शिक्षा प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सीबीएसई ने शुरू किया सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन पोर्टल
इसी बीच सीबीएसई ने कक्षा 12 के विद्यार्थियों के लिए अंक सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन की ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध करा दी है। तकनीकी बाधाओं और साइबर सुरक्षा से जुड़े एहतियाती उपायों के कारण इस पोर्टल की शुरुआत निर्धारित समय पर नहीं हो सकी थी, जिससे छात्रों और अभिभावकों में चिंता बढ़ गई थी।
मंगलवार को बोर्ड ने जानकारी दी कि पोर्टल अब पूरी तरह सक्रिय है और छात्र निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकते हैं। बोर्ड ने विद्यार्थियों को आवेदन से पहले दिशा-निर्देशों को ध्यानपूर्वक पढ़ने की सलाह भी दी है।
गौरतलब है कि पोर्टल को एक जून से शुरू किया जाना था, लेकिन तकनीकी समस्याओं के कारण इसमें देरी हुई। अब इसके शुरू होने से छात्रों को अपने अंकों के सत्यापन और उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन के लिए ऑनलाइन सुविधा मिल सकेगी।
क्यों महत्वपूर्ण है आज की बैठक?
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा मूल्यांकन प्रणाली और भाषा नीति दोनों ही सीधे तौर पर करोड़ों छात्रों के शैक्षणिक भविष्य से जुड़ी हैं। ऐसे में संसदीय समिति की समीक्षा न केवल मौजूदा व्यवस्थाओं का आकलन करेगी, बल्कि भविष्य की शिक्षा नीतियों और सुधारों की दिशा भी तय कर सकती है।