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'मौका मिले तो नरेंद्र मोदी स्टेडियम को गिराकर दोबारा बनाऊंगा': ललित मोदी ने क्यों कहा ऐसा ?

उन्होंने ऐसे परिसर की कल्पना की जिसमें शॉपिंग मॉल, मनोरंजन क्षेत्र, बेहतर कूलिंग सिस्टम, प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी सुविधाएं और दर्शकों के लिए अधिक आरामदायक माहौल हो।

By लखन भारती

Jun 02, 2026 16:23 IST

ललित मोदी का मानना है कि अहमदाबाद का नरेंद्र मोदी स्टेडियम दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खेल स्थलों में शामिल हो सकता है, लेकिन इसके लिए इसे प्रशंसकों की जरूरतों को केंद्र में रखकर विकसित करना होगा। करिश्मा मेहता को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अगर उन्हें मौका मिले तो वह मौजूदा स्टेडियम को पूरी तरह तोड़कर आधुनिक सुविधाओं के साथ दोबारा बनाना चाहेंगे।

आईपीएल के संस्थापक ललित मोदी ने करिश्मा मेहता के साथ बातचीत में नरेंद्र मोदी स्टेडियम के भविष्य को लेकर अपनी सोच साझा की। उनका मानना है कि यह स्टेडियम दुनिया के सबसे बेहतरीन खेल परिसरों में बदल सकता है, लेकिन इसके लिए आधुनिक सुविधाओं और प्रशंसकों के अनुभव पर विशेष ध्यान देना होगा। मोदी ने कहा, 'अगर मैं आज वहां होता तो मैं इस स्टेडियम को गिराकर पूरी तरह से दोबारा बनाता। आधुनिक एस्केलेटर, आधुनिक किचन, आधुनिक रेस्तरां बनाता। इसे 365 दिन सक्रिय रहने वाली जगह में बदल देता।'

सिर्फ क्रिकेट नहीं, सालभर सक्रिय रहने वाला केंद्र

ललित मोदी का मानना है कि आधुनिक स्टेडियम केवल मैचों तक सीमित नहीं होने चाहिए। उन्होंने ऐसे परिसर की कल्पना की जिसमें शॉपिंग मॉल, मनोरंजन क्षेत्र, बेहतर कूलिंग सिस्टम, प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी सुविधाएं और दर्शकों के लिए अधिक आरामदायक माहौल हो। उन्होंने कहा, 'तकनीक मौजूद है। आप पांच सितारा होटल जैसी गुणवत्ता वाले बाथरूम बना सकते हैं, सेल्फ-क्लीनिंग टॉयलेट्स लगा सकते हैं और अत्याधुनिक बुनियादी ढांचा तैयार कर सकते हैं। दर्शकों को पांच मिनट के भीतर स्टेडियम में प्रवेश और बाहर निकलने की सुविधा मिलनी चाहिए।'

भारतीय स्टेडियमों के संचालन पर भी उठाए सवाल

बातचीत के दौरान मोदी ने भारत के कई स्टेडियमों के संचालन के तरीके पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि अक्सर ध्यान दर्शकों के अनुभव को बेहतर बनाने के बजाय राजस्व बढ़ाने पर केंद्रित रहता है। उन्होंने कहा, 'मैच तीन घंटे का होता है, लेकिन दर्शक उससे काफी पहले पहुंच जाते हैं। वे वहां चार से पांच घंटे बिताते हैं और अक्सर उनके साथ छोटे बच्चे भी होते हैं। ऐसे में स्वच्छ सुविधाएं, अच्छा भोजन और आरामदायक माहौल होना जरूरी है। यही वह चीज है जिसकी कमी महसूस होती है।'

भविष्य के स्टेडियम कैसे होने चाहिए?

ललित मोदी के मुताबिक, आने वाले समय में स्टेडियमों को केवल मैच वाले दिनों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उनका मानना है कि खेल परिसरों को ऐसे मनोरंजन केंद्रों में बदलना होगा जो पूरे साल लोगों को आकर्षित करें। उन्होंने कहा कि स्टेडियमों का भविष्य ऐसे बहुउद्देश्यीय केंद्रों में है, जो सालभर सक्रिय रहें और लोगों को खेल के साथ-साथ अन्य मनोरंजन सुविधाएं भी प्रदान करें। ललित मोदी की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब दुनिया भर में खेल परिसरों को आधुनिक तकनीक और दर्शक-केंद्रित सुविधाओं के साथ विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

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