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टैरिफ घटेंगे, बाजार खुलेगा: भारत-यूके डील को जमीन पर उतारने तेज हुई कूटनीतिक कवायद

पीयूष गोयल से बातचीत में निवेश, व्यापार बाधाओं और शुल्क ढांचे पर होगा फोकस; 47.9 अरब पाउंड के द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक दोगुना करने का लक्ष्य।

By श्वेता सिंह

Jun 02, 2026 18:52 IST

नई दिल्लीः ब्रिटेन के व्यापार सचिव पीटर काइल 2 जून मंगलवार को नई दिल्ली पहुंचे, जहां उनका मुख्य उद्देश्य भारत के साथ हाल ही में हस्ताक्षरित व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) को जल्द प्रभावी बनाना है। यह दौरा दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।

इस यात्रा के दौरान पीटर काइल केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात करेंगे। बैठक में टैरिफ संरचना को आसान बनाने, निवेश बढ़ाने और व्यापारिक बाधाओं को कम करने जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी। ब्रिटेन सरकार का कहना है कि यह समझौता दोनों देशों के लिए पारस्परिक लाभ देने वाला साबित होगा।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 के अंत तक भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय व्यापार 47.9 अरब पाउंड (लगभग 64–65 अरब अमेरिकी डॉलर) तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत अधिक है। इसमें ब्रिटेन का भारत को निर्यात 19.3 अरब पाउंड और भारत का ब्रिटेन को निर्यात लगभग 28 अरब पाउंड दर्ज किया गया है। भारत फिलहाल इस व्यापार में अधिशेष की स्थिति में है।

दोनों देशों ने मिलकर 2030 तक आपसी व्यापार को दोगुना करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। प्रस्तावित समझौते के लागू होने के बाद व्हिस्की, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स और आईटी सेवाओं जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है।

यह समझौता कुल 30 अध्यायों में विभाजित है, जिसमें केवल शुल्क कटौती ही नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण, श्रम मानक, लैंगिक समानता, नवाचार और डिजिटल व्यापार जैसे व्यापक विषय शामिल हैं। इसके तहत ब्रिटेन की 99 प्रतिशत और भारत की 90 प्रतिशत टैरिफ लाइनों को उदार किया जाएगा, जिससे व्यापार अधिक सरल और तेज होगा।

इस समझौते के लागू होने पर भारतीय उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में लगभग पूर्ण ड्यूटी-फ्री पहुंच मिलेगी, जबकि ब्रिटिश कंपनियों को भारत के बड़े और तेजी से बढ़ते बाजार में निवेश और विस्तार के नए अवसर प्राप्त होंगे। इससे रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

ब्रिटिश सरकार के अनुसार यह समझौता यूरोपीय संघ से बाहर निकलने के बाद उसका सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय व्यापार करार है। यह न केवल व्यापार को गति देगा, बल्कि दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को रणनीतिक स्तर पर भी मजबूत करेगा।

पीटर काइल ने कहा कि वह इस समझौते को अमल में लाने के लिए दिल्ली आए हैं ताकि दोनों देशों को जल्द इसके लाभ मिल सकें। अपने दौरे के दौरान वह भारतीय और ब्रिटिश उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे, जहां संयुक्त निवेश, साझेदारी और नए व्यावसायिक अवसरों पर चर्चा होगी। साथ ही स्टील जैसे कुछ क्षेत्रों में टैरिफ संबंधी मुद्दे भी बातचीत का हिस्सा रहेंगे।

वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बीच यह समझौता स्थिर और दीर्घकालिक साझेदारी का प्रतीक माना जा रहा है। ब्रिटेन अन्य वैश्विक साझेदारों जैसे खाड़ी सहयोग परिषद, अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ भी व्यापार विस्तार कर रहा है, लेकिन भारत उसके लिए प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।

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