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'मां को एक, बेटे को दूसरा घर चाहिए', बंगला विवाद पर सम्राट चौधरी का तंज

राबड़ी देवी के सरकारी आवास को लेकर छिड़े विवाद के बीच मुख्यमंत्री ने कहा- लोकतंत्र में पद के साथ सुविधाएं भी बदलती हैं।

By श्वेता सिंह

Jun 02, 2026 17:08 IST

शेखपुराः बिहार में सरकारी आवास को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिना किसी का नाम लिए राष्ट्रीय जनता दल (राजद) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकारी बंगले को निजी संपत्ति की तरह नहीं देखा जा सकता और यह व्यवस्था किसी राजशाही की तरह नहीं चल सकती।

शेखपुरा में आयोजित राज्य सरकार के ‘सहयोग शिविर’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोग सरकारी आवास को अपनी विरासत समझने लगे हैं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, “मां को एक घर चाहिए और बेटे को दूसरा घर चाहिए। यह कोई राजशाही नहीं है।” उनका यह बयान पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव से जुड़े आवास विवाद के संदर्भ में देखा जा रहा है।

गौरतलब है कि राबड़ी देवी अभी भी 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास में रह रही हैं, जबकि विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष होने के नाते उन्हें 39 हार्डिंग रोड का आवास आवंटित किया जा चुका है। दूसरी ओर तेजस्वी यादव 1 पोलो रोड स्थित सरकारी आवास में रह रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने इस दौरान अपने निजी जीवन का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से वह अपने निजी घर में ही रह रहे हैं और मुख्यमंत्री बनने के बाद भी आधिकारिक आवास में जाने का निर्णय तत्काल नहीं लिया था। उनके अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आग्रह के बाद ही उन्होंने मुख्यमंत्री आवास से कामकाज शुरू किया।

सम्राट चौधरी ने कहा कि नीतीश कुमार ने पद छोड़ने के बाद सरकारी आवास तुरंत खाली कर राजनीतिक मर्यादा का उदाहरण पेश किया था। उन्होंने कहा कि जिस दिन पार्टी नेतृत्व उनसे पद छोड़ने को कहेगा, वह बिना किसी हिचकिचाहट के अपना सामान समेटकर चले जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में राज्य सरकार की नई ‘सहयोग’ पहल का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पंचायत स्तर पर आयोजित किए जा रहे सहयोग शिविरों का उद्देश्य लोगों की समस्याओं का तय समयसीमा में समाधान करना है। इसके लिए ‘सहयोग पोर्टल’ भी शुरू किया गया है, जहां विभिन्न विभागों से जुड़ी शिकायतें दर्ज की जा सकती हैं।

उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी आवेदन का 30 दिनों के भीतर निपटारा नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। लापरवाही पाए जाने पर 31वें दिन स्वतः निलंबन तक की कार्रवाई संभव होगी।

कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अपराधियों के खिलाफ सख्त नीति अपनाई गई है और पुलिस को पूरी स्वतंत्रता दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून तोड़ने वालों के साथ किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी।

तेजस्वी यादव द्वारा हाल में लगाए गए कथित ‘जाति आधारित एनकाउंटर’ के आरोपों पर भी मुख्यमंत्री ने अप्रत्यक्ष प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अपराधियों की कोई जाति नहीं होती और सरकार केवल कानून के आधार पर कार्रवाई करती है। राज्य में सुशासन और कानून का राज कायम रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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