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शानिमोल उस्मान केरल विधानसभा की डिप्टी स्पीकर चुनी गईं, 99 वोटों से दर्ज की बड़ी जीत

यूडीएफ उम्मीदवार ने एलडीएफ प्रत्याशी को हराया, मतदान से दूर रही बीजेपी।

By श्वेता सिंह

Jun 02, 2026 12:55 IST

तिरुवनंतपुरमः केरल की राजनीति में मंगलवार को महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिला, जब यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) की नेता शानिमोल उस्मान को राज्य विधानसभा का उपाध्यक्ष चुन लिया गया। उन्होंने विपक्षी वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के उम्मीदवार मुहम्मद मुहसिन को 99 मतों के मुकाबले 34 मतों से पराजित किया।

इस चुनाव के साथ शानिमोल उस्मान केरल विधानसभा के इतिहास में उपाध्यक्ष पद संभालने वाली चौथी महिला बन गई हैं।

विधानसभा में हुई मतदान प्रक्रिया

16वीं केरल विधानसभा के पहले सत्र के दौरान उपाध्यक्ष पद के लिए मतदान सुबह 9 बजे शुरू हुआ। परिणाम की घोषणा विधानसभा अध्यक्ष थिरुवनचूर राधाकृष्णन ने की। उन्होंने बताया कि कुल मतदान में शानिमोल उस्मान को 99 वोट मिले, जबकि एलडीएफ उम्मीदवार मुहम्मद मुहसिन को 34 वोट प्राप्त हुए।

चार सदस्यों ने मतदान से दूरी बनाई, जिनमें विधानसभा अध्यक्ष भी शामिल रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने इस प्रक्रिया में अपना वोट नहीं डाला।

बीजेपी ने मतदान से बनाई दूरी

इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधायकों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। हालांकि वे सदन में उपस्थित रहे, लेकिन मतदान से दूर रहकर उन्होंने इस मुकाबले से स्वयं को अलग रखा।

उपाध्यक्ष पद का यह चुनाव उस समय हुआ जब हाल ही में गठित 16वीं विधानसभा का पहला सत्र चल रहा है। इससे पहले राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने 29 मई को सदन में नीति भाषण प्रस्तुत किया था, जिसमें सरकार की प्राथमिकताओं का उल्लेख किया गया।

सरकार के एजेंडे में विकास और सामाजिक योजनाएं

नीति भाषण में मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के नेतृत्व वाली सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित किया गया, जिसमें सामाजिक कल्याण योजनाएं, आर्थिक विकास, सार्वजनिक क्षेत्र में सुधार और नशा विरोधी अभियान जैसे मुद्दे शामिल थे।

महिला यात्रियों के लिए केएसआरटीसी बसों में मुफ्त यात्रा, कॉलेज छात्राओं को मासिक भत्ता, सामाजिक पेंशन में वृद्धि, स्वास्थ्य बीमा कवरेज का विस्तार और युवा उद्यमियों के लिए ब्याज-मुक्त ऋण जैसी घोषणाएं भी चर्चा में रहीं।

यह उपाध्यक्ष चुनाव राज्य में हाल ही में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद आयोजित किया गया है, जहां कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ ने लंबे अंतराल के बाद सत्ता में वापसी की है। ऐसे में यह चुनाव राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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